मुंबई : महाराष्ट्र में भटक्या-विमुक्त समाज के लोगों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। पालों और अस्थायी बस्तियों में रहने वाले इस समाज के लोगों के स्थायी पुनर्वास के लिए महज 1 रुपये में जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इस प्रस्ताव को जल्द मंत्रिमंडल के सामने रखने के निर्देश राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दिए हैं।
यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जिन्हें आज भी स्थायी ठिकाने की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है। सरकार की पहल का उद्देश्य ऐसे परिवारों को स्थायी रूप से बसाने और उनके लिए नई बस्तियां विकसित करने की दिशा में कदम उठाना है।
अधिकारियों की लापरवाही पर मंत्री नाराज
अन्य पिछड़ा वर्ग, विमुक्त जाति, घुमंतू जनजाति और विशेष पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति की सातवीं बैठक मुंबई के सह्याद्री अतिथिगृह में हुई। बैठक की अध्यक्षता राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की। बैठक में उन्होंने संबंधित अधिकारियों के कामकाज पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बैठकों में दिए गए निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और जरूरी प्रस्ताव समय पर प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं।
बावनकुले ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां जमीन उपलब्ध कराने से संबंधित प्रस्ताव भी तैयार किए जाएं। सभी संबंधित अधिकारियों को 29 अक्टूबर तक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही पालों और अस्थायी बस्तियों में रहने वाले भटक्या-विमुक्त समाज के नागरिकों को जाति प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
भेड़पालकों के लिए चारे और चराई की व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में राज्य के भेड़पालक समुदाय के सामने आने वाली चराई की समस्या पर भी चर्चा हुई। सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में भेड़पालकों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया गया। वन मंत्री गणेश नाईक ने अधिकारियों को ड्रोन सर्वे के माध्यम से चारे की उपलब्धता का आकलन करने और जिला योजना एवं विकास समिति (डीपीडीसी) के फंड से चारे की व्यवस्था करने का सुझाव दिया।
बैठक में बताया गया कि शासन के निर्णय के अनुसार राज्य के 21 वन विभागों में जून से सितंबर तक भेड़ों की चराई के लिए कानूनी अनुमति दी गई है। वहीं, वन क्षेत्र उपलब्ध नहीं होने वाले अन्य 27 वन विभागों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चराई के लिए जगह उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में 9 प्रतिशत के बैकलॉग और आर्थिक असमानता को दूर करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
महाज्योति के बजट पर उठा सवाल
बैठक में महात्मा ज्योतिबा फुले अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था यानी ‘महाज्योति’ और अन्य पिछड़ा वर्ग के महामंडलों को मिलने वाले फंड का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मंत्री छगन भुजबल ने महाज्योति और सारथी संस्था के बजट में अंतर पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि सारथी संस्था को 1,484 करोड़ रुपये मिल रहे हैं, जबकि महाज्योति को केवल 288 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने सभी संस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार समान अवसर और पर्याप्त फंड उपलब्ध कराने की मांग की। इस पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आश्वासन दिया कि बजट में निर्धारित राशि कम नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराने के संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी। बैठक में विमुक्त जाति और घुमंतू जनजाति (VJNT) वर्ग के लिए अलग बजट तैयार करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
ओबीसी विद्यार्थियों के छात्रावासों पर भी जोर
अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण मंत्री अतुल सावे ने ओबीसी विद्यार्थियों के छात्रावासों से जुड़े मुद्दों पर अपनी भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने निर्देश दिया कि छात्रावासों को एक साथ क्लब नहीं किया जाए। कार्यालयीन कामकाज के लिए जगह और विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था अलग-अलग होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय कामकाज में देरी या लापरवाही के लिए संबंधित विभाग जिम्मेदार होगा। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि नवी मुंबई के सिडको बेलापुर रेलवे स्टेशन परिसर में महामंडलों और उनकी सहायक कंपनियों के लिए 11,455 वर्ग फुट जगह खरीदने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
अब प्रस्तावों पर अमल का इंतजार
भटक्या-विमुक्त समाज के लिए एक रुपये में जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव, भेड़पालकों के लिए चराई और चारे की व्यवस्था, महाज्योति के बजट का मुद्दा और विद्यार्थियों के छात्रावासों से जुड़ी समस्याएं बैठक के प्रमुख विषय रहे। हालांकि, जमीन उपलब्ध कराने की योजना को लेकर अभी प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल के सामने रखने की प्रक्रिया बाकी है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्ताव कब मंजूर होता है और इसका लाभ जरूरतमंद परिवारों तक कब पहुंचता है।


