अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की घटती लोकप्रियता अब उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का कारण बनती नजर आ रही है। नवंबर में होने वाले महत्वपूर्ण मिडटर्म चुनावों से पहले कई रिपब्लिकन नेता और उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। वजह साफ है उन्हें डर है कि ट्रम्प के साथ खुलकर खड़े होने का असर उनके अपने चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
ट्रम्प की लोकप्रियता 30% तक पहुंची
एपी-एनओआरसी के ताजा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के मुताबिक, सिर्फ 30% अमेरिकी नागरिक ट्रम्प के कामकाज से संतुष्ट हैं। अर्थव्यवस्था को संभालने के मामले में उनका अप्रूवल रेटिंग 26% और महंगाई व बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के मुद्दे पर महज 17% है। वहीं, 65% से ज्यादा लोगों का मानना है कि महंगाई और बढ़ती कीमतों के लिए ट्रम्प की नीतियां जिम्मेदार हैं। 64% लोगों ने यह भी माना कि आयात शुल्क के मामले में ट्रम्प जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ गए हैं।
ईरान युद्ध और इमिग्रेशन पर भी विरोध
ट्रम्प की नीतियों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असहमति बढ़ रही है। आयोवा के सांसद और सीनेट उम्मीदवार एशले हिंसन तथा मिशिगन के सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स ने ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की मांग की है। वहीं, आयोवा के जैक नन और मारियानेट मिलर-मीक्स ने ट्रम्प के युद्धकालीन अधिकारों को सीमित करने के पक्ष में डेमोक्रेट्स के साथ मतदान किया। फ्लोरिडा की सांसद मारिया ने भी ट्रम्प की सख्त इमिग्रेशन नीति पर सवाल उठाए हैं।
ट्रम्प के नाम से भी बच रहे उम्मीदवार
सबसे दिलचस्प बदलाव चुनाव प्रचार में दिखाई दे रहा है। कई रिपब्लिकन उम्मीदवारों ने अपनी वेबसाइट और प्रचार सामग्री से ट्रम्प का नाम और उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का जिक्र तक हटा दिया है। कुछ नेता ट्रम्प के साथ मंच साझा करने से भी बच रहे हैं। यानी पार्टी के भीतर अब यह सवाल उठ रहा है कि ट्रम्प का साथ चुनाव जिताएगा या नुकसान पहुंचाएगा।
विवेक रामास्वामी के सामने भी बड़ी चुनौती
ट्रम्प के मजबूत गढ़ माने जाने वाले ओहायो में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी के लिए भी मुकाबला आसान नहीं दिख रहा। 24 से 27 सितंबर के मैरिस्ट सर्वेक्षण में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन को 50% समर्थन मिला, जबकि रामास्वामी 44% पर हैं। यानी एक्टन को 6 प्रतिशत अंकों की बढ़त हासिल है। 2024 में ट्रम्प ने ओहायो में 11 अंकों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। ओहायो में ट्रम्प का अप्रूवल रेटिंग भी 42% बताया गया है, जबकि 41% मतदाताओं का कहना है कि उनका वोट मुख्य रूप से ट्रम्प के खिलाफ होगा। ऐसे में रामास्वामी के लिए यह मुकाबला ट्रम्प की लोकप्रियता से अलग अपनी पहचान और समर्थन साबित करने की चुनौती बन गया है।
कांग्रेस में भी डेमोक्रेट्स की बढ़त
राष्ट्रीय स्तर पर भी रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ती दिख रही है। नट सिल्वर के औसत आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस के जेनेरिक बैलेट में डेमोक्रेट्स की बढ़त सितंबर की शुरुआत के 6.7 अंकों से बढ़कर 9 अंक हो गई है। अगर यह रुझान कायम रहा, तो हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी को सत्ता गंवाने का खतरा हो सकता है।
सिनेट में फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का संख्याबल है, लेकिन जिन सीटों को पहले सुरक्षित माना जा रहा था, वहां भी मुकाबला अब कड़ा होता नजर आ रहा है। मिडटर्म चुनाव अभी बाकी हैं, लेकिन मौजूदा माहौल रिपब्लिकन पार्टी के लिए खतरे की घंटी जरूर बजा रहा है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ट्रम्प कितने लोकप्रिय हैं, बल्कि यह भी है कि उनकी लोकप्रियता में गिरावट का असर अब उनकी अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के भविष्य पर कितना पड़ता है।


