सोना आमतौर पर मुश्किल समय में निवेशकों का सहारा माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। 28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई लड़ाई के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 20 फीसदी तक टूट चुका है।
इस हफ्ते भी सोने पर दबाव बना रहा। शुक्रवार तक शुरुआती तेजी कायम नहीं रह सकी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.9 फीसदी गिरकर 4,140 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, गोल्ड फ्यूचर्स करीब 1 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,162 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में सोने में करीब 3.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
महंगाई बढ़ने की चिंता बनी वजह
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर बाजार में यह चिंता है कि इससे अमेरिका समेत दुनियाभर में महंगाई बढ़ सकती है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व समेत दूसरे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। ब्याज दरें बढ़ने की संभावना के बीच सोने में निवेश का आकर्षण कम होता है और इसका असर कीमतों पर दिखाई देता है।
अब फेड के फैसले पर नजर
बुलियन बाजार की नजर अब महीने के अंत में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। पहले माना जा रहा था कि फेड चेयरमैन केविन वॉर्श 28 अक्टूबर को लगातार दूसरी बार ब्याज दर बढ़ा सकते हैं। हालांकि, हाल में सामने आए महंगाई के आंकड़े उम्मीद से कम रहे हैं। ऐसे में अब यह संभावना बढ़ी है कि फेड इस महीने ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकता है।
इस हफ्ते की शुरुआत में अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 70 फीसदी मानी जा रही थी, जो अब घटकर करीब 22 फीसदी रह गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने की दिशा पर फेड का फैसला अहम असर डाल सकता है। अगर ब्याज दरों में बदलाव नहीं होता है, तो सोने पर बना दबाव कुछ कम होने की संभावना पर बाजार की नजर रहेगी। भारत में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण बुलियन मार्केट और कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स बंद रहे। अब घरेलू बाजार 5 अक्टूबर, सोमवार को खुलेंगे।


