शेयर बाजार के मिडकैप सेगमेंट में सितंबर का महीना निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा है। Nifty Midcap 150 Index सितंबर में अब तक करीब 7 फीसदी गिर चुका है। खास बात यह है कि इंडेक्स में शामिल 150 में से 131 शेयर यानी करीब 87 फीसदी शेयर एक महीने पहले की तुलना में नुकसान में हैं।
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच मिडकैप इंडेक्स में 21 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली थी। 26 अगस्त 2026 को Nifty Midcap 150 ने NSE पर 23,647.50 का नया उच्च स्तर भी बनाया था। हालांकि, सितंबर की गिरावट के बाद इंडेक्स अब अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज (200-DMA) से नीचे कारोबार कर रहा है। यह स्तर करीब 21,870 के आसपास है। मिडकैप में आई यह गिरावट Nifty 50 की तुलना में भी ज्यादा रही है। सितंबर में Nifty 50 करीब 6 फीसदी नीचे आया है, जबकि Nifty Smallcap 250 में करीब 3.5 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है।
कई बड़े मिडकैप शेयरों में भारी गिरावट
सितंबर में कई प्रमुख मिडकैप शेयरों पर खासा दबाव देखने को मिला। KEI Industries, Godrej Properties और Suzlon Energy में करीब 17 से 21 फीसदी तक की गिरावट आई है। वहीं, इस महीने Nifty Midcap 150 के कुल 32 शेयर 10 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं। इसके उलट कुछ शेयरों ने इस गिरावट के बीच भी अच्छा प्रदर्शन किया है। Patanjali Foods करीब 13 फीसदी चढ़ा, जबकि Blue Star में 8 फीसदी और Jindal Stainless में करीब 6 फीसदी की तेजी रही।
आगे भी उतार-चढ़ाव की आशंका
Geojit Financial Services के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरांग शाह के मुताबिक, अगर बाजार में लीवरेज्ड पोजिशन यानी उधार के पैसे से बनाई गई पोजिशन कम होने लगती हैं, तो मिडकैप सेगमेंट में दबाव और बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं तो मिडकैप इंडेक्स में करीब 5 फीसदी और गिरावट की संभावना बन सकती है। वहीं, Religare Broking के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजित मिश्रा का कहना है कि मिडकैप में मौजूदा गिरावट को अप्रैल से आई तेज रैली के बाद का करेक्शन भी माना जा सकता है। उनके मुताबिक, अब आने वाला रिजल्ट सीजन बाजार की आगे की दिशा के लिए अहम रहेगा।
21,550 का स्तर अहम
HDFC Securities के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह ने Nifty Midcap 150 के लिए 21,550 के स्तर को अहम बताया है। उनके मुताबिक, अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे जाता है तो करीब 21,230 तक फिसलने की स्थिति बन सकती है। अब निवेशकों की नजर आने वाले तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नतीजे नहीं आने पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है। वहीं, बेहतर नतीजे इस सेगमेंट में निवेशकों के भरोसे को सहारा दे सकते हैं।


