नागपुर : चंद्रपुर जिले के पडोली में प्रस्तावित ‘ट्रक टर्मिनस’ को लेकर मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अहम फैसला सुनाया है। राज्य सरकार और म्हाडा की ओर से तय कानूनी अवधि में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण 2.28 हेक्टेयर जमीन पर लगा ‘ट्रक टर्मिनस’ का आरक्षण रद्द कर दिया गया है।
यह जमीन चंद्रपुर-बल्लारपुर क्षेत्रीय विकास योजना के तहत 1 सितंबर 1998 को ट्रक टर्मिनस के लिए आरक्षित की गई थी। लेकिन कई साल बीतने के बावजूद जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका। आखिरकार जमीन मालिकों भारत वाघिडे समेत छह लोगों ने आरक्षण हटाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
नोटिस के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
जमीन मालिकों ने 3 मार्च 2023 को महाराष्ट्र प्रादेशिक व नगररचना कानून की धारा 127 के तहत विशेष नियोजन प्राधिकरण म्हाडा को खरीद नोटिस दी थी। नोटिस के बाद 24 महीने की कानूनी अवधि भी पूरी हो गई, लेकिन प्रशासन की ओर से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की पीठ के सामने हुई। कोर्ट ने जमीन मालिकों की याचिका मंजूर करते हुए ट्रक टर्मिनस का आरक्षण रद्द कर दिया।
‘निधि नहीं मिली’, म्हाडा ने दी जानकारी
सुनवाई के दौरान म्हाडा ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से जमीन अधिग्रहण के लिए जरूरी निधि उपलब्ध नहीं होने के कारण आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निधि उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर नागरिकों को उनकी जमीन के इस्तेमाल से अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता। कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता अब संबंधित नियमों के अनुसार अपनी जमीन का विकास कर सकते हैं। वर्षों से आरक्षण के कारण जमीन के इस्तेमाल पर लगी रोक के बाद जमीन मालिकों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


