नई दिल्ली : डिजिटल पेमेंट आज आम जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। छोटी दुकान से लेकर बड़े कारोबार तक, UPI के जरिए भुगतान करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन गई है। लेकिन अब UPI से जुड़े प्रस्तावित शुल्क को लेकर व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी विरोध में देशभर के व्यापारी 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाने जा रहे हैं।
व्यापारी संगठनों के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर 0.40 प्रतिशत MDR शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में इस तरह का अतिरिक्त शुल्क उनके लिए आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है।
2 अक्टूबर को क्या होगा?
‘No UPI Day’ के तहत व्यापारी उस दिन UPI के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं करने का निर्णय ले सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों को नकद या कार्ड से भुगतान करना पड़ सकता है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM) और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) सहित विभिन्न व्यापारी संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। व्यापारियों का तर्क है कि पेट्रोल-डीजल, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स, अनाज और कपड़े जैसे कई कारोबार पहले से ही सीमित मार्जिन पर चलते हैं। ऐसे में UPI लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लागू होने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है।
मध्य प्रदेश से शुरू हुआ विरोध अब देशभर तक
इस मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश में भी व्यापारियों ने विरोध जताया था। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में करीब 125 व्यापारी संगठनों ने 23 सितंबर को ‘No UPI Day’ मनाया। व्यापारी संगठनों के मुताबिक, इस दौरान राज्य के करीब 25 प्रतिशत कारोबार पर असर पड़ा। अब 2 अक्टूबर को इसी तरह का विरोध देशभर में देखने को मिल सकता है। महाराष्ट्र में भी Maharashtra Chamber of Commerce, Industry and Agriculture (MACCIA) समेत विभिन्न व्यापारी संगठनों ने आंदोलन को समर्थन दिया है।
MACCIA के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे के अनुसार, इस मुद्दे पर देश के कई व्यापारी संगठनों के साथ चर्चा की गई है। वहीं, इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने भी शुल्क का फैसला वापस नहीं लिए जाने पर 15 अक्टूबर से पहले UPI QR कोड के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। फिलहाल UPI शुल्क को लेकर व्यापारी संगठनों और संबंधित पक्षों के बीच विरोध बढ़ता नजर आ रहा है। ऐसे में 2 अक्टूबर का ‘No UPI Day’ डिजिटल पेमेंट को लेकर देशभर में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकता है।


