महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति के बीच किसानों की परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं। ऐसे समय में किसानों तक सिर्फ कागजी आंकड़ों के जरिए नहीं, बल्कि सीधे उनके खेतों और बांध तक पहुंचने की जरूरत पर जोर दिया गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने पार्टी के सभी मंत्रियों, पालकमंत्रियों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों और प्रमुख पदाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में जाकर किसानों से सीधे संवाद करने के निर्देश दिए हैं।
सुनेत्रा पवार ने कहा कि प्राकृतिक संकट के समय किसानों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उनके खेतों तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए, नुकसान का जायजा लेना चाहिए और उन्हें आवश्यक प्रशासनिक सहायता दिलाने के लिए तत्काल प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब किसान मुश्किल में हों, तब उनके साथ मजबूती से खड़ा रहना हमारी जिम्मेदारी है। किसानों की समस्याएं सुनकर उन्हें भरोसा दिलाना और सरकार के माध्यम से जरूरी मदद उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करना जरूरी है। साथ ही, किसानों के बीच यह विश्वास पैदा करने का आह्वान किया गया कि पार्टी के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता इस कठिन समय में उनके साथ खड़े हैं।
खेतों तक पहुंचकर हो नुकसान का सही आकलन
हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने भी अधिकारियों को नुकसान का वास्तविक आकलन करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि कोंकण में बारिश के अंतराल के कारण धान, नाचणी सहित खरीफ फसलों पर पड़े प्रभाव को केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। अधिकारियों को किसानों के खेतों तक जाकर वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए।
कृषि मंत्री ने फसल बीमा, एनडीआरएफ और सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व, कृषि और संबंधित विभागों को क्षेत्र में जाकर नुकसान का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने तथा आवश्यक पंचनामे और प्रस्ताव समय पर पूरा करने को कहा।
किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति काफी हद तक खेती पर निर्भर होती है। ऐसे में फसल को हुआ नुकसान केवल खेत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के आर्थिक गणित को प्रभावित करता है। इसलिए संकट की इस घड़ी में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और किसानों तक सीधी पहुंच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


