नागपुर : डिजिटल पेमेंट आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। किराना दुकान से लेकर होटल, पेट्रोल पंप और इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी तक, ज्यादातर लोग मोबाइल निकालकर कुछ ही सेकंड में यूपीआई से भुगतान कर देते हैं। लेकिन अब यूपीआई पर लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का असर भुगतान के तरीके पर भी दिखाई दे सकता है। अगर कुछ व्यापारी बड़े लेनदेन में डिजिटल पेमेंट के बजाय नकद भुगतान पर जोर देने लगते हैं, तो आने वाले समय में ‘कैश’ की मांग बढ़ सकती है।
केंद्र सरकार के नए फैसले के अनुसार, 15 अक्टूबर से 2 हजार रुपये से अधिक के पात्र व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू होगा। 75 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए अधिकतम 300 रुपये तक शुल्क निर्धारित किया गया है। यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, लेकिन कुछ मामलों में व्यापारियों का डिजिटल पेमेंट खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में कम मुनाफे वाले कारोबार में कुछ व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
व्यापारी फिर मांग सकते हैं ‘कैश’
पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने भुगतान का तरीका काफी बदल दिया है। पहले खरीदारी के लिए लोग जेब में पर्याप्त नकद रखते थे, लेकिन अब मोबाइल और क्यूआर कोड के जरिए भुगतान करना आसान हो गया है। व्यापारियों के लिए भी रोज की नकदी संभालने, सुरक्षित रखने और बैंक में जमा करने का झंझट कम हुआ है। अब अगर शुल्क का असर व्यापारियों के खर्च पर पड़ता है, तो कुछ व्यापारी ग्राहकों से नकद भुगतान का आग्रह कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में ग्राहक भी खरीदारी के लिए निकलते समय पहले की तुलना में ज्यादा नकद साथ रखने की कोशिश कर सकते हैं।
एटीएम पर बढ़ सकती है निर्भरता
नकद लेनदेन बढ़ने का सीधा असर एटीएम और बैंक शाखाओं पर भी पड़ सकता है। बड़े लेनदेन के लिए अगर लोग अधिक नकदी निकालने लगते हैं, तो एटीएम में नोटों की मांग बढ़ सकती है। इससे एटीएम में बार-बार कैश भरने की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नकद की मांग बढ़ने पर बैंकिंग व्यवस्था को भी उसके अनुरूप ज्यादा नकदी उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही कैश हैंडलिंग, नकदी परिवहन, सुरक्षा और एटीएम प्रबंधन से जुड़े खर्च पर भी दबाव बढ़ सकता है।
बाजार में बढ़ सकता है ‘कैश फ्लो’
अगर बड़े डिजिटल लेनदेन का कुछ हिस्सा वापस नकद में जाता है, तो बाजार में घूमने वाली नकदी का प्रवाह बढ़ सकता है। व्यापारियों के पास ज्यादा नकदी जमा होने पर उसे बैंक तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त समय, कर्मचारी और परिवहन व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर, डिजिटल लेनदेन की तुलना में नकद भुगतान बढ़ने पर लेनदेन की डिजिटल रिकॉर्डिंग भी कम हो सकती है। इसका असर बाजार की भुगतान व्यवस्था और नकदी प्रबंधन पर दिखाई दे सकता है।
किस पर क्या असर पड़ सकता है?
ग्राहक : बड़े लेनदेन के लिए ज्यादा नकद साथ रखने की जरूरत पड़ सकती है।
व्यापारी : एमडीआर का खर्च बचाने के लिए कुछ व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
बैंक : कैश मैनेजमेंट और एटीएम में नकदी भरने का काम बढ़ सकता है।
बाजार : कुछ बड़े लेनदेन डिजिटल से नकद भुगतान की ओर जा सकते हैं।
कर व्यवस्था : नकद लेनदेन बढ़ने पर डिजिटल लेनदेन की तुलना में रिकॉर्डिंग कम हो सकती है।
हर खरीदारी से पहले जेब में कैश?
आज स्थिति यह है कि कई लोग बाजार जाते समय नाममात्र की नकदी लेकर निकलते हैं। भरोसा मोबाइल और यूपीआई पर रहता है। लेकिन अगर कुछ व्यापारी बड़े भुगतान के लिए नकद पर जोर देते हैं, तो ग्राहकों को भी अपनी खरीदारी की योजना के साथ नकदी का हिसाब रखना पड़ सकता है।
यानी जिस डिजिटल भुगतान ने लोगों को जेब में ज्यादा पैसे रखने की जरूरत कम कर दी थी, अब शुल्क की नई व्यवस्था के कारण कुछ परिस्थितियों में वही ग्राहक फिर से नोटों पर निर्भर होते नजर आ सकते हैं। हालांकि इसका वास्तविक असर कितना होगा, यह व्यापारियों और ग्राहकों के व्यवहार में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।


