नई दिल्ली : UPI को लेकर देश में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 15 अक्टूबर 2026 से कुछ पात्र UPI व्यापारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होने वाला है। इस फैसले को लेकर कुछ विपक्षी दलों ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिका के दबाव में लिया गया है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने स्पष्ट किया है कि UPI से जुड़े नीतिगत फैसले भारत अपने स्तर पर लेता है। सरकार के मुताबिक, MDR का फैसला अमेरिका के दबाव में नहीं, बल्कि डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
अमेरिकी रिपोर्ट में UPI को लेकर क्या कहा गया था?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की 2026 की रिपोर्ट में भारत की UPI व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताएं जताई गई थीं। रिपोर्ट में अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सेवा देने वाली कंपनियों को UPI व्यवस्था में भारतीय कंपनियों के समान अवसर नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया था। खासतौर पर क्रेडिट कार्ड से जुड़े UPI लेनदेन का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में NPCI की 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी सीमा का भी जिक्र किया गया था। इस नियम का उद्देश्य किसी एक थर्ड पार्टी UPI ऐप को बाजार पर हावी होने से रोकना है। इसकी मौजूदा समयसीमा दिसंबर 2026 तक है।
फिर MDR को अमेरिका से क्यों जोड़ा गया?
USTR की रिपोर्ट और उसके बाद MDR की घोषणा सामने आने के कारण दोनों मामलों को जोड़कर देखा जाने लगा। लेकिन DFS ने इस संबंध को साफ तौर पर खारिज किया है। सरकार के अनुसार, 15 सितंबर के NPCI सर्कुलर में UPI से जुड़े क्रेडिट लेनदेन के लिए RuPay के अलावा अन्य क्रेडिट कार्ड नेटवर्क को अनुमति नहीं दी गई है। ऐसे में अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए MDR लागू करने का दावा सही नहीं है, ऐसा DFS का कहना है।
किन UPI लेनदेन पर लगेगा MDR?
नए नियम के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के पात्र P2M यानी ग्राहक से व्यापारी को किए जाने वाले UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 से ज्यादा के लेनदेन पर अधिकतम MDR ₹300 तय किया गया है। कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग दरें लागू होंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं वसूला जा सकेगा।
क्या हर UPI पेमेंट पर अब देना होगा ज्यादा पैसा?
ऐसा नहीं है। DFS के मुताबिक P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा करीब 96 प्रतिशत व्यापारी UPI लेनदेन भी MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। यानी रोजमर्रा में किए जाने वाले हर UPI भुगतान पर ग्राहक से अलग से शुल्क लिया जाएगा, ऐसा इस फैसले का मतलब नहीं है।
सरकार ने MDR लागू करने की क्या वजह बताई?
सरकार का कहना है कि देश में UPI का इस्तेमाल लगातार बड़े स्तर पर हो रहा है, लेकिन इतनी बड़ी डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को लंबे समय तक चलाने के लिए एक टिकाऊ आर्थिक मॉडल भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनिंदा बड़े व्यापारी लेनदेन से MDR के जरिए मिलने वाला राजस्व बैंकों, पेमेंट ऐप्स और दूसरे सेवा प्रदाताओं के बीच जाएगा। DFS के अनुसार, इससे छोटे पेमेंट प्लेटफॉर्म को भी बड़े UPI प्लेटफॉर्म के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अधिक टिकाऊ कारोबारी मॉडल मिल सकता है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक, UPI पर MDR लागू करने का फैसला अमेरिका के दबाव का नतीजा होने के दावे को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है। सरकार इसे भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।


