मुंबई : मुंबई की भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में दरवाजे पर लटककर सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बंद दरवाजे वाली लोकल एक सुरक्षित विकल्प मानी जा रही थी। लेकिन अब इसके लिए मुंबईकरों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। ऑटोमैटिक दरवाजों वाली नॉन-एसी क्लोज्ड-डोर लोकल की सुरक्षा जांच के दौरान तकनीकी और यांत्रिक दिक्कतें सामने आई हैं। इसके चलते यह प्रोजेक्ट फिलहाल आगे खिसक गया है।
सुरक्षा जांच के लिए भेजे गए एक रेक में जरूरी सुधार किए जाने हैं। इसलिए इसे चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) वापस भेजा जाएगा। वहीं दूसरा रेक कुर्ला कारशेड में ही खड़ा है। इस लोकल की कन्फर्मेटरी ऑसिलोग्राफ कार रन (COCR) जांच रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) की ओर से उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश सीमा पर स्थित 63.27 किलोमीटर लंबे खजुराहो-महोबा मार्ग पर की गई थी। इस दौरान कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, जिसके कारण रेक तय सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर सका।
सुधार के बाद दोबारा होगी जांच
मध्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संबंधित रेक को ICF भेजकर जरूरी तकनीकी बदलाव और मरम्मत की जाएगी। इसके बाद रेक की दोबारा सुरक्षा जांच होगी। सुधार, दोबारा जांच और जरूरी सुरक्षा मंजूरी पूरी होने के बाद ही इस लोकल को यात्री सेवा में शामिल करने पर फैसला लिया जाएगा। मुंबई की लोकल में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए बंद दरवाजे वाली लोकल से सुरक्षित यात्रा की उम्मीद जुड़ी है। लेकिन तकनीकी अड़चनों के चलते फिलहाल यह उम्मीद और इंतजार दोनों थोड़ा लंबा हो गया है।


