नई दिल्ली : देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने अपना फोकस और अधिक आक्रामक एवं तकनीक आधारित करने के संकेत दिए हैं। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशभर से आए करीब 850 अधिकारियों के सामने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में रहने का अधिकार अधिकृत नागरिकों को है और देश को जल्द से जल्द घुसपैठ मुक्त करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होना बेहद जरूरी है।
अब खतरा आने का इंतजार नहीं
गृह मंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों के काम करने के तरीके में बदलाव पर जोर दिया। उनका कहना है कि किसी घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय खतरे की पहले पहचान कर उसे रोकना जरूरी है। आने वाले 15 से 20 वर्षों में देश और दुनिया में होने वाले बदलावों का अनुमान लगाकर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए गए। सीमा सुरक्षा और पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर हमले, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन में रुकावट और फेक न्यूज जैसे आधुनिक खतरों पर भी नजर रखने को कहा गया।
आतंकवाद के पूरे नेटवर्क पर वार
आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘प्रहार’ रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी शाह ने जोर दिया। आतंकवादियों के केवल ठिकानों तक सीमित न रहते हुए उनके फंडिंग, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को निशाना बनाने की बात कही गई। नशे के खिलाफ लड़ाई के लिए उन्होंने ‘3-D’ फॉर्मूला—Detect, Disrupt और Destroy पर जोर दिया। यानी ड्रग नेटवर्क की पहचान करना, उसके नेटवर्क को बाधित करना और पूरे जाल को खत्म करना।
सीमा सुरक्षा में चार पक्ष साथ आएंगे
अमित शाह ने बताया कि पिछले आठ महीनों में सभी भू-सीमा वाले राज्यों का दौरा कर सीमा सुरक्षा के लिए फोर-पॉइंट अप्रोच तैयार किया गया है। इसमें सीमा सुरक्षा बल, राज्य एवं जिला प्रशासन, केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर रहेगा। उन्होंने घुसपैठ को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा न मानते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन से जुड़ा विषय बताया।
सुरक्षा में AI और डेटा की बड़ी भूमिका
सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। CCTNS, ICJS, NATGRID और NAFIS जैसी प्रणालियों को बेहतर तरीके से जोड़कर जांच एजेंसियों तक जरूरी जानकारी तेजी से पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। युवा अधिकारियों से अपराध के पैटर्न को समझने और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण करने के लिए AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल बढ़ाने का आह्वान किया गया।
विदेशों में छिपे 274 अपराधी भारत लाए गए
सम्मेलन में यह भी बताया गया कि 2019 से 2026 के बीच विदेशों में छिपे 274 फरार अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। वहीं, ‘भारतपोल’ के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय को और मजबूत करने की बात कही गई।
कुल मिलाकर, अमित शाह के संदेश से साफ है कि आने वाले समय में भारत की सुरक्षा व्यवस्था केवल घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहेगी। घुसपैठ, आतंकवाद, ड्रग्स, साइबर अपराध और डिजिटल खतरों की पहले पहचान कर उन्हें रोकना सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनने जा रहा है।


