समरकंद : विश्व शतरंज की सबसे मजबूत टीमों में गिने जाने वाले रूस को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। 2026 शतरंज ओलंपियाड में रूस की पुरुष और महिला राष्ट्रीय टीमें हिस्सा नहीं ले पाएंगी। तटस्थ झंडे के तहत खेलने की रूस की आखिरी कोशिश को भी मंजूरी नहीं मिली है।
उज्बेकिस्तान के समरकंद में 15 से 28 सितंबर 2026 तक शतरंज ओलंपियाड का आयोजन होना है। रूस ने इस प्रतिष्ठित टीम प्रतियोगिता में वापसी के लिए तटस्थ झंडे के तहत खेलने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, रूसी शतरंज महासंघ के कार्यकारी निदेशक अलेक्जेंडर तकाचेव के अनुसार, FIDE परिषद ने दोनों रूसी टीमों की भागीदारी को खारिज कर दिया।
लगातार तीसरी बार रूस की गैरमौजूदगी
इस फैसले के साथ रूस लगातार तीसरे शतरंज ओलंपियाड से बाहर रहेगा। यूक्रेन में रूस के सैन्य अभियान के बाद अंतरराष्ट्रीय खेलों में रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर शतरंज पर भी बना हुआ है। तकाचेव ने फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कुछ लोग खेल को राजनीति से ऊपर रखते हैं, जबकि कुछ लोग अपने निजी हितों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने FIDE परिषद के फैसले को लेकर निराशा व्यक्त की है। हालांकि, FIDE की ओर से अभी इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रूस के बिना अधूरा है शतरंज ?
रूसी शतरंज महासंघ के उपाध्यक्ष सर्गेई स्मागिन ने भी रूस को ओलंपियाड से बाहर रखे जाने पर प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि रूस जैसी बड़ी शतरंज शक्ति के बिना कोई भी बड़ा शतरंज टूर्नामेंट पूरी तरह मुकम्मल नहीं माना जा सकता। स्मागिन ने यह भी कहा कि रूस की अंतरराष्ट्रीय शतरंज में वापसी तय है। सवाल सिर्फ इतना है कि यह वापसी कब होगी।
रूस का शतरंज में दशकों पुराना दबदबा रहा है। कई महान खिलाड़ियों और विश्व चैंपियनों की विरासत से जुड़ा रूस आज अंतरराष्ट्रीय टीम प्रतियोगिताओं में अपनी जगह के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में 2026 ओलंपियाड से उसकी गैरमौजूदगी एक बार फिर खेल और राजनीति के बीच खिंची लकीर को सामने लाती है। अब समरकंद में होने वाले शतरंज ओलंपियाड में दुनिया की शीर्ष टीमें रूस के बिना खिताब के लिए मुकाबला करेंगी।


