ईमानदार लकड़हारे की छोटी सी बेटी

एक गाँव में गौरी नाम की एक छोटी-सी लड़की अपने पिता के साथ रहती थी। उसके पिता जंगल से लकड़ियाँ लाकर अपना घर चलाते थे।

एक दिन जंगल में उन्हें एक पेड़ के पास चमकती हुई सोने की चाबी मिली। पिता ने चाबी उठाई और घर ले आए।

गौरी ने चाबी देखते ही कहा,
“बाबा, यह हमारी नहीं है। जिसके घर की होगी, उसे जरूर इसकी जरूरत होगी।”

पिता ने बेटी की बात मानी और अगले दिन गाँव में चाबी के मालिक को ढूँढने लगे।

काफी देर बाद एक बूढ़े आदमी ने बताया कि वह चाबी उसके पुराने संदूक की थी। उसमें उसकी पत्नी की आखिरी निशानी रखी थी। चाबी खो जाने के बाद वह बहुत परेशान था।

चाबी वापस मिलते ही बूढ़े आदमी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने गौरी को इनाम देना चाहा, लेकिन गौरी ने विनम्रता से कहा,

“मुझे इनाम नहीं चाहिए। किसी की खोई हुई चीज उसे वापस मिल जाए, यही सबसे बड़ी खुशी है।”

बूढ़े आदमी ने गौरी के सिर पर हाथ रखा और कहा,
“तुम छोटी जरूर हो, लेकिन तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है।”

उस दिन से गाँव में गौरी की ईमानदारी की मिसाल दी जाने लगी।

कहानी से सीख

ईमानदारी की कीमत किसी भी धन से ज्यादा होती है। सही काम करने से मिलने वाली खुशी सबसे अनमोल होती है।

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