ईरान युद्ध में MQ-9 ड्रोन को नुकसान, फिर भी भारत ने क्यों लिया एक और बड़ा फैसला?

30 महीने के लिए 2 MQ-9B Sea Guardian ड्रोन लीज पर लेगा भारतीय नौसेना

नई दिल्ली : ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को नुकसान पहुंचने की खबरों के बीच भारत ने अमेरिका के साथ दो और MQ-9B Sea Guardian ड्रोन लीज पर लेने का करार किया है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ करीब 1,943 करोड़ रुपये का यह करार किया है। दोनों ड्रोन भारतीय नौसेना को 30 महीने के लिए मिलेंगे।

हिंद महासागर पर रहेगी लगातार नजर

भारतीय नौसेना 2020 से लीज पर लिए गए MQ-9B ड्रोन का इस्तेमाल हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी के लिए कर रही है। नए करार का मकसद नौसेना की समुद्री निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता को और मजबूत करना है। MQ-9B Sea Guardian हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस यानी HALE श्रेणी का रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम है। इसमें अत्याधुनिक सेंसर और अलग-अलग पेलोड लगाए जा सकते हैं, जिससे समुद्र के बड़े हिस्से पर लंबे समय तक निगरानी रखना संभव होता है।

युद्ध में ड्रोन को नुकसान, फिर भी भरोसा क्यों?

ईरान-अमेरिका संघर्ष में MQ-9 ड्रोन के नुकसान की खबरों के बाद भारत के इस फैसले को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लेकिन भारत के लिए इन ड्रोन का इस्तेमाल किसी एक युद्ध तक सीमित नहीं है। भारतीय नौसेना के सामने हिंद महासागर के विशाल क्षेत्र की लगातार निगरानी की जिम्मेदारी है। समुद्री रास्तों से होने वाली तस्करी, समुद्री डकैती, संदिग्ध गतिविधियों और दूसरे देशों की नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखना इसके लिए बेहद जरूरी है। यही वजह है कि लंबे समय तक हवा में रहकर निगरानी करने वाले ड्रोन नौसेना के लिए उपयोगी साबित होते हैं। मानवयुक्त निगरानी विमान की तुलना में इनमें पायलट की जान सीधे जोखिम में नहीं होती और लंबे समय तक एक क्षेत्र पर नजर रखी जा सकती है।

भारत पहले ही कर चुका है 31 MQ-9B का सौदा

भारत ने अक्टूबर 2024 में अमेरिका के साथ 31 MQ-9B ड्रोन खरीदने का समझौता किया था। इनमें भारतीय नौसेना के लिए Sea Guardian और भारतीय थल सेना तथा वायु सेना के लिए Sky Guardian वेरिएंट शामिल हैं। इन 31 ड्रोन की डिलीवरी शुरू होने में समय लगना है। ऐसे में अतिरिक्त दो Sea Guardian ड्रोन की लीज को अंतरिम अवधि में नौसेना की निगरानी क्षमता बनाए रखने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत क्या?

MQ-9B की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी अवधि तक निगरानी करने की क्षमता है। पायलट को विमान के अंदर बैठकर उड़ान नहीं भरनी पड़ती, बल्कि इसे जमीन से रिमोट तरीके से संचालित किया जाता है। यानी युद्ध के दौरान किसी ड्रोन के नुकसान का मतलब यह नहीं कि उसकी पूरी उपयोगिता खत्म हो गई। भारत के लिए MQ-9B का मुख्य उद्देश्य समुद्र के विशाल क्षेत्र में लगातार खुफिया जानकारी, निगरानी और टेहळणी को मजबूत करना है। इसी जरूरत को देखते हुए ईरान युद्ध में MQ-9 ड्रोन को हुए नुकसान के बावजूद भारत ने इन पर अपना भरोसा कायम रखा है।

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