नागपंचमी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और प्रकृति एवं जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से हुई थी। इसके बाद उनके पुत्र राजा जनमेजय ने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए सभी नागों के विनाश के उद्देश्य से सर्पसत्र यज्ञ शुरू किया।
यज्ञ की अग्नि में बड़ी संख्या में नाग गिरने लगे। जब नागों की रक्षा करने वाले आस्तिक ऋषि को इसकी जानकारी हुई, तो वे यज्ञ स्थल पर पहुंचे। उन्होंने राजा जनमेजय से यज्ञ रोकने का अनुरोध किया। आस्तिक ऋषि की बात मानकर राजा ने यज्ञ रोक दिया और नागों की रक्षा हुई।
धार्मिक मान्यता है कि इसी घटना की स्मृति में नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन नागों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है।
नागपंचमी के दिन नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु दूध, फूल, अक्षत, हल्दी, चंदन और फल अर्पित करते हैं। कई जगह शिवलिंग की पूजा भी की जाती है, क्योंकि भगवान शिव के गले में नाग को धारण किए हुए स्वरूप की पूजा की जाती है।
नागपंचमी का संबंध केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण से भी जोड़ा जाता है। सांप खेतों में चूहों और अन्य कीटों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यह पर्व मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देता है। इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने के बाद नाग देवता की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा की जाती है। फूल, अक्षत, चंदन और फल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु नागपंचमी की कथा सुनते या पढ़ते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
कई स्थानों पर भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग पर जल अर्पित करने की भी परंपरा है।
नागपंचमी केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है। सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए इस पर्व का सार यही है कि आस्था के साथ-साथ जीवों की सुरक्षा और प्रकृति के संरक्षण की जिम्मेदारी भी समझी जाए।
नागपंचमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
1. सिलाई-कढ़ाई या काटने वाले काम से बचते हैं
कुछ क्षेत्रों में सुई, चाकू या अन्य नुकीली वस्तुओं के इस्तेमाल से भी बचने की परंपरा है। हालांकि यह पूरे भारत में एक जैसी मान्यता नहीं है।
2. कंघी नहीं करते
कुछ क्षेत्रों में नागपंचमी के दिन कंघी करने की भी मनाही मानी जाती है। लोकमान्यता है कि बालों में कंघी करते समय टूटे हुए बाल या जूं आदि जमीन पर गिर सकते हैं और जमीन में रहने वाले जीवों को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि यह वैज्ञानिक नियम नहीं, बल्कि पुरानी लोकपरंपरा है।
3. तवे पर रोटी नहीं सेंकते
यह नागपंचमी की सबसे प्रचलित मान्यताओं में से एक है। कई घरों में इस दिन तवा चूल्हे पर नहीं रखा जाता और रोटी बनाने से परहेज किया जाता है। मान्यता है कि तवा नाग के फन का प्रतीक माना जाता है और उसे गर्म करना नाग देवता का अपमान समझा जाता है।


