नई दिल्ली : आठवें वेतन आयोग के सामने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों के वेतन और पेंशन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। अगर इन मांगों पर विचार होता है, तो कर्मचारियों और पेंशनधारकों की आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने हाल ही में दिल्ली में आयोग के सदस्यों के सामने अपनी मांगों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया।
भारत पेंशनर्स समाज के प्रतिनिधिमंडल ने चंद्रलोक भवन, जनपथ में आठवें वेतन आयोग के समक्ष कई मुद्दे उठाए। BPS का कहना है कि वह देशभर के करीब 10 लाख पेंशनधारकों का प्रतिनिधित्व करता है।
₹69 हजार बेसिक सैलरी की मांग
BPS ने ₹69,000 की बेसिक सैलरी और इसके लिए 3.83 फिटमेंट फैक्टर रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही ₹45,000 की बेसिक पेंशन तय करने की मांग भी रखी गई है। पेंशन तय करने के लिए 5.2 वेटेड फैमिली यूनिट को आधार बनाने का सुझाव दिया गया है। इसमें कर्मचारी के साथ उसके जीवनसाथी, बच्चों और आश्रित माता-पिता को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है।
आखिरी सैलरी का 67% पेंशन का प्रस्ताव
BPS ने रिटायरमेंट के समय मिलने वाली आखिरी सैलरी के 67 प्रतिशत के बराबर पेंशन निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, फैमिली पेंशन के मामले में 50 प्रतिशत राशि तय करने की मांग की गई है।
हर तीन महीने में DA-DR में बदलाव?
महंगाई के बढ़ते असर को देखते हुए BPS ने DA और DR में हर तीन महीने में बदलाव करने की मांग की है। साथ ही, अगर DR 25 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो उसे मूल पेंशन में शामिल करने पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।
मेडिकल से लेकर HRA-LTC तक कई मांगें
पेंशनधारकों के लिए पेंशन में समानता, हर पांच साल में वेतन और पेंशन की समीक्षा, HRA और LTC जैसी सुविधाओं की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा CCHS में सुधार और कैशलेस इलाज की सुविधा देने की मांग की गई है।
BPS ने फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को बढ़ाकर ₹5,000 प्रति माह करने का प्रस्ताव भी रखा है।
फिलहाल ये सभी मांगें आठवें वेतन आयोग के सामने रखे गए प्रस्ताव हैं। इन पर अंतिम फैसला आयोग और सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। सरकारी कर्मचारी और पेंशनधारक अब इन मांगों पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।


