नई दिल्ली : केंद्र सरकार की सख्ती के बीच मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने पहली बार अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुई कई गंभीर चूकों को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। कंपनी ने माना कि प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन, डीपफेक कंटेंट और एल्गोरिदम से जुड़ी कई तकनीकी व नीतिगत कमियां सामने आईं, जिनके लिए उसे खेद है।
जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान मेटा ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर पैसे खर्च किए गए थे। इस पूरे मामले में कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने का भरोसा दिया है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले में न तो मेटा और न ही मार्क जुकरबर्ग ने कोई माफी मांगी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में हुई बैठक में इस मुद्दे पर कोई चर्चा भी नहीं हुई। सरकारी अधिकारियों ने मेटा को यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी सिर्फ एक “मध्यस्थ” की भूमिका में नहीं आती, क्योंकि उसका एल्गोरिदम खुद तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा। ऐसे में मेटा को आईटी कानून के तहत मिलने वाले “सेफ हार्बर” संरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
गौरतलब है कि दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन वाला वीडियो कुछ समय के लिए मेटा के प्लेटफॉर्म से हट गया था। इसके बाद केंद्र सरकार और संसदीय समिति ने मेटा के अधिकारियों से कई सवाल पूछे थे। अब कंपनी ने बाल यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म संचालन में हुई अन्य गंभीर चूकों पर माफी तो मांगी है, लेकिन पीएम मोदी का वीडियो हटाने के मामले में कोई खेद व्यक्त नहीं किया है।


