नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम (MCD) के टोल टैक्स और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) वसूली से जुड़े टेंडर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। श्री साई एंटरप्राइजेज और अश्मी रोड कैरियर्स ने इस टेंडर में करीब 700 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दिल्ली में प्रवेश करने वाले निजी कारों को छोड़कर अन्य सभी व्यावसायिक वाहनों से वाहन के प्रकार, वजन और ईंधन के आधार पर टोल टैक्स और पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) वसूला जाता है। सामान्य तौर पर कार से करीब 100 रुपये और बस से लगभग 700 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि एमसीडी ने एमएलएफएफ (MLFF) आधारित टोल टैक्स और ECC वसूली के लिए जारी निविदा में एक कंपनी ने 5,500 करोड़ रुपये की सबसे अधिक बोली लगाई थी। इसके बावजूद उसे अयोग्य घोषित कर 4,700 करोड़ रुपये की बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका दे दिया गया।
अश्मी रोड कैरियर्स के प्यारे खान का दावा है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag प्रणाली लागू होने के बावजूद दिल्ली में एमसीडी के टोल और ECC वसूली केंद्रों पर अब भी नकद वसूली की जा रही है। उनका कहना है कि इससे वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानी और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि सात बोलीदाताओं में से केवल तीन को ही पात्र घोषित किया गया, जबकि टेंडर की शर्तें कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गईं। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि अधिक बोली लगाने के बावजूद उनकी कंपनियों को अयोग्य ठहराया गया।
शिकायतकर्ताओं ने यह दावा भी किया है कि मामला दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद जल्दबाजी में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ठेका आवंटित कर दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, इस मामले में दिल्ली नगर निगम (MCD) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


