314 दिनों तक समंदर से मुकाबला… भारत की 9 वीर बेटियां लौटीं घर, रचा नया इतिहास

चार महासागरों में 25,500 नॉटिकल मील की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर मुंबई पहुंचीं तीनों सेनाओं की महिला अधिकारी; रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- भारत की बेटियों का हौसला हर तूफान से बड़ा

नई दिल्ली :  भारत की नौ महिलाओं ने ऐसा इतिहास रच दिया है, जिस पर पूरे देश को गर्व है। सेना, नौसेना और वायुसेना की नौ महिला अधिकारियों ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान के तहत 314 दिनों तक समुद्र की कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए करीब 25,500 नॉटिकल मील की विश्व परिक्रमा सफलतापूर्वक पूरी की। भारतीय सेना के नौकायन पोत IASV त्रिवेणी से यह दल सुरक्षित मुंबई लौट आया।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अभियान का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिर्फ समुद्री अभियान नहीं, बल्कि नारी शक्ति, तीनों सेनाओं के मजबूत समन्वय और नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। करीब दो साल की तैयारी और लगातार प्रशिक्षण के बाद शुरू हुई इस यात्रा ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया। दल ने चार महासागरों में सफर करते हुए विषुवत रेखा को दो बार पार किया, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को लांघा और केप लीउविन, केप हॉर्न तथा केप ऑफ गुड होप जैसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों को सफलतापूर्वक पार किया।

इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक ड्रेक पैसेज को पार करना भी रहा, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में गिना जाता है। इस सफलता के साथ महिला अधिकारियों को प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स’ समुदाय की सदस्यता भी मिली। रक्षा मंत्री ने महिला अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि समुद्र की लहरें चाहे कितनी भी ऊंची हों, भारत की बेटियों का हौसला उनसे कहीं ज्यादा ऊंचा है। उन्होंने कहा कि आज देश की महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं। यह अभियान इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की अधिकारी एक टीम के रूप में करीब दस महीने तक साथ रहीं। इससे तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त क्षमता का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।

यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के बंदरगाहों पर पहुंचकर इस दल ने भारत की संस्कृति, समुद्री परंपरा और सैन्य पेशेवर क्षमता का भी परिचय दिया। इससे दुनिया के सामने भारत की सकारात्मक छवि और मजबूत हुई। रक्षा मंत्री ने कहा कि पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार IASV त्रिवेणी आत्मनिर्भर भारत की ताकत का उदाहरण है। यह पोत भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, स्वदेशी तकनीक और रणनीतिक आत्मविश्वास को दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और महिला अधिकारियों के परिजनों ने इन वीर बेटियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनकी यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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