उत्तराखंड : डिजिटल दौर में पढ़ाई के लिए तकनीक की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में 10वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब इन छात्रों को टैबलेट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
इस फैसले की घोषणा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम के दौरान की। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के ‘मुख्य सेवक सदन’ में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यभर से चुने गए 140 छात्रों ने हिस्सा लिया। इस दौरान धामी ने छात्रों से बातचीत कर उनके विचार, सुझाव और उत्तराखंड के भविष्य को लेकर उनकी सोच जानी।
टैबलेट के लिए सीधे खाते में मिलेगी राशि
सरकारी स्कूलों के 10वीं और 12वीं के छात्रों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने के लिए टैबलेट खरीदने की आर्थिक मदद दी जाएगी। सरकार टैबलेट उपलब्ध कराने के बजाय उसकी राशि सीधे छात्रों के बैंक खाते में ट्रांसफर करेगी। इससे छात्र अपनी जरूरत के अनुसार टैबलेट खरीद सकेंगे। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने और छात्रों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।
2.67 लाख से ज्यादा छात्रों ने रखे विचार
‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ अभियान में राज्य के 2 लाख 67 हजार 744 छात्रों ने निबंध, विचार और सुझाव प्रस्तुत किए। इनमें से 140 छात्रों का चयन कर मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद का अवसर दिया गया। छात्रों ने शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, पर्यटन, सड़क और परिवहन, वन एवं पर्यावरण, खेल, पलायन, स्वरोजगार, स्टार्टअप और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार जैसे मुद्दों पर अपने सुझाव दिए।
छात्रों के सुझावों पर सरकार करेगी विचार
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की ओर से दिए गए उपयोगी और व्यवहारिक सुझावों को सरकारी योजनाओं और नीति निर्माण में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर विचार रखने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया गया। इनमें शिक्षा और युवा अवसर, पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, बुनियादी ढांचा, तकनीक एवं सुशासन, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा महिला एवं बाल कल्याण जैसे विषय शामिल रहे। छात्रों की भागीदारी वाला यह कार्यक्रम सिर्फ उनके शैक्षणिक भविष्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर उनकी सोच और सुझावों को सामने लाने का माध्यम भी बना।


