नागपुर : संगीत प्रेमियों के लिए नागपुर में बीते तीन दिन सुरों के उत्सव से भरे रहे। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, नागपुर की ओर से आयोजित 33वें डॉ. वसंतराव देशपांडे स्मृति संगीत समारोह का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। 29 जुलाई से शुरू हुए इस तीन दिवसीय समारोह में देश के प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह के अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में रसिक श्रोता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री पं. रोनू मजूमदार के बांसुरी वादन से हुई। उन्होंने राग रामदासी मल्हार से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत करते हुए राग सुर मल्हार, मराठी नाट्य गीत ‘या भवनातील गीत पुराने’ और अभंग ‘माझे माहेर पंढरी’ की मनमोहक प्रस्तुति दी। उनकी मधुर बांसुरी की धुनों ने पूरे सभागृह को सुरमयी बना दिया। पं. रोनू मजूमदार के साथ तबले पर अंजिक्य जोशी, पखावज पर ओंकार दळवी और बांसुरी पर कल्पेश साचला ने शानदार संगत की। इसके बाद प्रसिद्ध गायक एवं संगीतकार डॉ. भरत बलवल्ली ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति दी। उन्होंने राग दुर्गा से अपने गायन की शुरुआत की। इसके बाद झिंझोटी सहित विभिन्न रचनाओं की प्रस्तुति देकर उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। स्वरचित वायरल भजन ‘हरि म्हाना’ और दीनानाथ मंगेशकर को श्रद्धांजलि स्वरूप प्रस्तुत की गई रचना ने विशेष आकर्षण बटोरा। उन्होंने भैरवी में ‘शिव के मन शरण’ के साथ अपनी प्रस्तुति का समापन किया। डॉ. भरत बलवल्ली के साथ ऑर्गन पर मकरंद कुंडले, तबले पर रामकृष्ण करंबेळकर और पखावज पर डॉ. दादा परब ने साथ संगत की।
वर्षों से संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने वालों का सम्मान
समारोह के दौरान केंद्र की उप निदेशक मिथिला तळवणेकर ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सहायक निदेशक (कार्यक्रम) दीपक कुलकर्णी और पूर्व कार्यक्रम कार्यकारी शशांक दंडे का शाल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया। कार्यक्रम का सूत्रसंचालन रेणुका देशकर ने किया। तीनों दिनों तक श्रोताओं की भारी उपस्थिति ने इस संगीत समारोह की लोकप्रियता को एक बार फिर साबित किया। इस आयोजन को सफल बनाने में केंद्र की निदेशक आस्था कार्लेकर, उप निदेशक मिथिला तळवणेकर, सहायक निदेशक (कार्यक्रम) दीपक कुलकर्णी सहित सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


