नई दिल्ली : तमिलनाडु में गौहत्या प्रतिबंध को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम दखल दिया है। मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी गई है, जिसमें राज्य में गायों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस भी जारी किया है।
यह मामला बकरी ईद के दौरान अधिकृत कत्लखानों के बाहर कथित रूप से गाय और बछड़ों की हत्या के आरोपों से जुड़ा था। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि मूल याचिका केवल इसी मुद्दे तक सीमित थी, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने इसके दायरे से बाहर जाकर पूरे राज्य में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दे दिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल हैं, ने कहा कि तमिलनाडु के मौजूदा कानूनों के अनुसार 10 वर्ष से अधिक आयु के गोवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश की वैधता पर विस्तृत सुनवाई आवश्यक है।
राज्य सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला कानून और मूल याचिका की सीमा से परे था। वहीं, मद्रास हाईकोर्ट ने 27 मई को संविधान के अनुच्छेद 48 और वर्ष 1976 के राज्य सरकार के आदेशों का हवाला देते हुए किसी भी दिन गाय या गोवंश की हत्या न करने के निर्देश दिए थे। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है। अब इस संवेदनशील मामले में अंतिम फैसला विस्तृत न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

