नई दिल्ली : देश की अदालतों में बढ़ते लंबित मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। महाराष्ट्र समेत सात राज्यों में न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने का रास्ता साफ हो गया है। इससे अनुभवी न्यायिक अधिकारियों को दो साल और सेवा का मौका मिल सकेगा।
किन राज्यों में लागू होगा फैसला?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का असर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल पर पड़ेगा। इन राज्यों को अपने सेवा नियमों में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं।
दो महीने में करना होगा नियमों में बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्य सरकारों को दो महीने के भीतर सेवा नियमों में जरूरी संशोधन करने को कहा है। इसके बाद संबंधित हाई कोर्ट न्यायिक अधिकारियों की योग्यता और कार्यक्षमता का मूल्यांकन करेंगे। इसी मूल्यांकन के आधार पर उन्हें आगे की दो साल की सेवा दी जा सकेगी।
लंबित मामलों का बढ़ता बोझ बड़ी वजह
इस फैसले के पीछे न्याय व्यवस्था पर बढ़ता मामलों का बोझ एक अहम कारण माना जा रहा है। देश की जिला अदालतों में करीब 5.18 करोड़ मामले लंबित बताए गए हैं। ऐसे में अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की सेवा जारी रहने से पुराने मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। अनुभवी अधिकारियों के पास वर्षों का न्यायिक अनुभव होता है। ऐसे में उनकी सेवा अवधि बढ़ने से जटिल और लंबे समय से लंबित मामलों को निपटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सेवा विस्तार अपने आप नहीं होगा। संबंधित अधिकारियों की योग्यता और प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
असहमति वाले राज्यों के लिए 1 अक्टूबर को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश 1 सितंबर 2026 को सुनाया गया था और इसे 4 सितंबर को सार्वजनिक किया गया। वहीं, जिन राज्यों को इस आदेश पर आपत्ति या असहमति है, उनके मामले में 1 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई होगी। इस फैसले से फिलहाल सात राज्यों की न्याय व्यवस्था में अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखने का रास्ता खुला है। अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकारें सेवा नियमों में कितनी जल्दी बदलाव करती हैं और इसका लंबित मामलों के निपटारे पर कितना असर पड़ता है।


