प्रेरणा प्रदीप वाडी ✍️
भगवान गणेश जी सृष्टी के पालन कर्ता है. प्रथम पूजा का सम्मान जिन्होने अपनी बुद्धी के बल पर प्राप्त किया है. ऐसे प्रथम पूजक विघ्नहर्ता गणेश जी सबके आद्य दैवत है. गणेश जी की मुर्ती संसार मे सभी जगह स्थापित है. फिर संत्रा नगरी नागपूर मे उनका मंदिर रहना क्रमप्राप्त है.और हमे इस बात पर अभिमान है कि नागपूर के आद्य दैवत सीताबर्डी टिले पर स्थित गणेश जी ही है.
लेकिन यह गणेश जी की मुर्ती मानवनिर्मित या मानवस्थापित नही बल्की स्वयंभू है.
मन्नतोंको पुरी करने वाले भगवान ऐसी इनकी कीर्ती सर्व दूर फैली हुई है. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर जी, पी व्ही नरसिंहराव जी,मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीसजी,रास्ते और राजमार्ग परिवहन मंत्री श्री नितीन गडकरी जी सभी इन गणेश जी के भक्त है. यहा तक कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी अपना भाषण इन्ही गणेश जी को नमन करते हुए शुरू किया था.
करिबन 300 साल पहले की बात है.नागपूरकर भोसलों का बडा रोब दाब एवम् प्रभाव था. उनके युद्ध कौशल्य एवम् नीतिमत्ता के बडे किस्से सुने है.
नागपूर के गणेश जी उनके आद्य दैवत थे. वे किसी भी शुभ कार्य के पहले या लढाई पर जाने के पहले अपने परिवार समित गणेश जी के दर्शन जरूर करते थे.उन दिनो शुक्रवारी तालाब का पानी सीताबर्डी टिले तक आता था. इसलिये राज परिवार के लोग नौका विहार से दर्शन के लिये आते थे.नागपुरकर वासियोंने बडे अच्छे सुनहरे दिन देखे है उनके राज मे.
लेकिन भारतीय इतिहास में यह कही बार साबित हुआ है कि यहा गद्दारी के दिमग ने राजकारण को चाट लिया है और नेस्तनाबूत कर दिया है. २६/२७ नवंबर १८१७ मे सीताबर्डी टिले पर हुए युद्ध के दौरान तत्कालिन राजा आप्पासाहेब भोसले को हार का सामना करना पडा.और ब्रिटिशोंने नागपूर को एवं सीताबर्डी किले को काबीज कर लिया.
अपने सुविधा के लिए अंग्रेजो ने रेल स्थानक एवम् पटरियों का काम हात मे लिया. तब किले के पूर्व भाग मे सुरंग लगाने पश्चात गणेश जी की मुर्ती मिली. जो पहले लसोडे या गुंदे के पेड के नीचे थी तत्पश्चात पीपल के पेड के नीचे आज जहाॅ है वहाॅ स्थापित कि गई.
कहते है गोंड राजा बख्त बुलंद शाह को सपने मे गणेश जी ने दर्शन देकर अपने आने की सूचना दि थी. इसलिये उन्होने १७०२ मे हेमाडपंथी मंदिर का निर्माण करके मूर्ती को स्थापित किया था.
मंदिर दक्षिण मुखी है लेकिन मूर्ती उत्तर मुखी है.मूर्ती भव्य दिव्य और तेजस्वी है. मूर्ती तीन फूट आडी और साडेचार फूट उंची है और दाहिनी सुंड वाली है. कहते है पहले मूर्ती छोटी सी थी फिर भी मूर्ती के दो पैर और चार हात दिखते थे. लेकिन आज कल शेंद्र की पुटों के कारन मूर्ती का आज का स्वरूप नजर आता है.
मूर्ती कभी बालरूप दर्शन देती है.तो कभी प्रौढरूप दर्शन देती है. आखिर जैसा भाव वैसे दर्शन यही सच है.
मंदिर मे गणेश जी की मुर्ती वही प्राचीन रखी है. लेकिन पहले १९७० मे पुनःनिर्माण का कार्य किया गया उसमे कुछ बदलाव किये गये. और १९८४ मी फिरसे पुनःनिर्माण किया गया तब आधुनिक रूप दिया गया और हाल ही मे फिरसे रूप बदल कर भव्य दिव्य रूप और सोने चांदी के नक्काशी से सौंदर्यीकरन किया गया.
मंदिर मे पहले कुछ पगडंडी उतरकर नीचे कालभैरव की मूर्ति और गणेश मूर्ती के पीछे भगवान शिवशंकर की पिंडी थी. हाल ही कुछ बदलाव कीये गये तब गणेश जी के सामने ही राधाकृष्ण की और कालभैरव की मूर्ति स्थापित की गई और पिछली बाजू मे राम सीता हनुमान जी की मुर्ती स्थापित है.
यहा गणेश जी के साथ ही विष्णु भगवान एवम् महादेव के दर्शन भी होते है. इसलिये इस स्थान का विशेष महत्त्व है.
गणेश मंदिर के सामने श्री महालक्ष्मी जी का मंदिर है. माताजी की मूर्ती लुभावनी और प्रसन्न है.
अभी अभी श्रद्धालुओंने दिये सुवर्ण और चांदीसे गर्भ गृह सजाया गया और ७५० किलो सुवर्ण सिंहासन पर गणेश मूर्ती को स्थापित किया है.
इस दैवी मूर्ती को अपने हाथो से कपास का छः फुटी हार बनाकर अर्पित करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ और स्थानिक समाचार पत्र मे उसे प्रसिद्धी दी गई.यह मै श्री गणेशजी का आशीर्वाद मानती हुॅं.
गणेश टिले के बाजू मे एक और गणपती का मंदिर है जिसे फौजी गणपती कहते है. वह इलाका फौज के नियंत्रण मे आता है इसलिये असे फौजी गणपती कहते है. वह स्थान भी बडा ही निसर्गरम्य एवं पवित्र है.
रेलस्थानक के बिलकुल नजीक यह स्थान होने के कारण सीताबर्डी पर मतलब शहर के केंद्रस्थान में यह पवित्र मंदिर है. इसलिये यहाॅ श्रद्धालुओंका ताता लगा रहता है.
मंदिर मे दिन मे तीन बार सुबह ६.३० बजे दोपहर १२ बजे और शाम को ६.३० बजे आरती और पूजा होती है.मंदीर सुबह ५.३० से रात ९ बजेट तक खुला रस्ता है.
गणेश मंदिर का ईलाका रक्षा मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में था श्री यशवंत राव चव्हाण रक्षा मंत्री थे तब उन्होंने यह जमीन मंंदीर ट्रस्ट को दी.मंदिर को ‘अ’ दर्जे का पर्यटन स्थल की मान्यता प्राप्त कर्माने हेतू सामाजिक कार्यकर्ता भूषण दवडे ने काफी प्रयास किये २०२३ मे श्री देवेंद्र फडणवीस के शासन काल मे इसे ‘अ’ दर्जे का पर्यटन स्थल घोषित किया गया.
विदर्भ के अष्ट विनायकों मे इनका प्रथम स्थान है. ऐसे श्री गणेश जी को मेरा शत शत बार नमन.
जय गणेश श्री गणेश.


