महाराष्ट्र में धर्मांतरण से जुड़े नए कानून को लागू करने का रास्ता अब साफ हो गया है। महाराष्ट्र धर्मस्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 आगामी 28 अगस्त 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा। खास बात यह है कि इसी दिन रक्षाबंधन भी है। ऐसे में फडणवीस सरकार के इस फैसले को बहनों के लिए बड़ी सौगात के तौर पर देखा जा रहा है। राज्य के गृह विभाग ने 17 अगस्त को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। Notification No. NAX-0724/C.R.240/Spl-1B के तहत महाराष्ट्र धर्मस्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 की धाराओं को लागू करने के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की गई है।
जबरन धर्मांतरण पर लगेगा कानून का शिकंजा
नए कानून का मुख्य उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी, लालच, गलत जानकारी या शादी का झांसा देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है। ऐसे मामलों में अब इसी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद इस कानून को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद गृह विभाग ने इसकी लागू होने की तारीख तय कर दी है।
सात साल तक की सजा का प्रावधान
महाराष्ट्र धर्मस्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 को इसी साल मार्च में हुए बजट सत्र के दौरान विधिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसके बाद विधेयक को राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब इसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है। कानून का उल्लंघन करने वालों को सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है। 28 अगस्त से महाराष्ट्र में जबरन, धोखे या लालच के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण के मामलों में नए कानून के तहत कार्रवाई शुरू हो सकेगी। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में धर्मांतरण के मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज होने की संभावना है।


