नई दिल्ली : भारत और रवांडा ने अपने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई दिल्ली में 6 और 7 जुलाई को आयोजित दूसरी संयुक्त रक्षा सहयोग समिति (JDCC) की बैठक में दोनों देशों ने सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त सैन्य अभ्यास, सैन्य चिकित्सा सहयोग और रक्षा उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने पर सहमति जताई। बैठक में तय किए गए विभिन्न प्रस्तावों को निर्धारित समयसीमा के भीतर लागू करने के लिए एक कार्ययोजना भी तैयार की गई।
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और रवांडा रक्षा बल मुख्यालय (RDF HQ) के चीफ फॉर जॉइंट फोर्स डेवलपमेंट, ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन ब्रिगेडियर जनरल लुईस कानोबायियर ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में रक्षा मंत्रालय, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), विदेश मंत्रालय, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं, मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (HQ IDS) तथा तीनों सेनाओं के प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठक के दौरान रवांडा के प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नए संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
रवांडा के प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्हें भारत के तेजी से विकसित हो रहे रक्षा औद्योगिक ढांचे, स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और तकनीकी प्रगति की जानकारी दी गई। दोनों देशों ने रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं की पहचान करते हुए भविष्य में साझेदारी को और गति देने की प्रतिबद्धता जताई। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने आर्मी हॉस्पिटल (रिफरल एंड रिसर्च) का दौरा किया, जहां उन्हें भारत की सैन्य चिकित्सा सेवाओं, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और सशस्त्र बलों के लिए विकसित व्यापक चिकित्सा सहायता प्रणाली की जानकारी दी गई।
गौरतलब है कि भारत और रवांडा के बीच रक्षा सहयोग संबंधी समझौता (MoU) जुलाई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रवांडा यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था। दूसरी JDCC बैठक के सफल आयोजन ने दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, संस्थागत समन्वय और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।


