मुंबई/नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में जारी तनाव के बीच ऊर्जा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम चर्चा हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को ऊर्जा आपूर्ति के स्रोत बढ़ाने और अमेरिका के साथ व्यापार को विस्तार देने पर जोर दिया। इससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आपूर्ति के विकल्प बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारत जैसे तेजी से विकास कर रहे देश के लिए ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति बेहद जरूरी है। ऐसे में अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ने से भारत को अपनी बढ़ती जरूरतों के लिए नए विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, इस दिशा में आगे होने वाले फैसले दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिए अहम होंगे।
जयशंकर और रुबियो के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ व्यापक बातचीत की। इस दौरान व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंध मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों की भी समीक्षा की गई। रुबियो ने भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है। साथ ही उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा और नागरिक परमाणु ऊर्जा सहयोग में हुई प्रगति की सराहना की। रुबियो ने अमेरिकी तकनीक और रक्षा प्रणालियों की खरीद बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
जामनगर रिफाइनरी पर भी रहेगी नजर
ऊर्जा सहयोग को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी भी चर्चा में है। रुबियो ने बुधवार को इस रिफाइनरी का दौरा करने के संबंध में कहा कि कच्चे तेल को उपयोग के लायक बनाने के लिए उसका शोधन जरूरी है। इसलिए बड़ी तेल शोधन क्षमता रखने वाली कंपनी के साथ बातचीत करना उचित है। भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रुबियो के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला में तेल उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज से भी चर्चा करेगा। रूस से कच्चे तेल की खरीद के सवाल पर रुबियो ने कहा कि भारत ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और अलग-अलग देशों से आपूर्ति के विकल्प बनाए रखना महत्वपूर्ण विषय है।
व्यापार समझौते पर भी बढ़ी उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। रुबियो इससे पहले कह चुके हैं कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। इस समझौते का उद्देश्य आयात शुल्क से जुड़े तनाव को कम करना और दोनों देशों के बाजारों तक पहुंच को बेहतर बनाना है। हालांकि, अमेरिकी शुल्क वृद्धि, एच-1बी वीजा शुल्क में बढ़ोतरी और आव्रजन नीतियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में ऊर्जा और रक्षा सहयोग के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिशें महत्वपूर्ण हैं।
इससे पहले रुबियो ने मुंबई स्थित ताज स्मारक पर जाकर 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमलों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। इस हमले में छह अमेरिकी नागरिकों की भी मौत हुई थी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ऊर्जा और व्यापार के मुद्दों पर हुई यह बातचीत भारत-अमेरिका संबंधों को किस दिशा में ले जाती है और क्या इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिल पाते हैं।


