नई दिल्ली : सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के पीछे कई बार बच्चों की मासूमियत और उनकी सुरक्षा का सवाल भी छिपा होता है। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के एटा जिले से जुड़े एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने Meta, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और एटा जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है।
NHRC की ओर से यह कार्रवाई 28 सितंबर 2026 को की गई। आयोग की सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन की शिकायत पर मामले का संज्ञान लिया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एटा जिले से संचालित बताए जा रहे एक Instagram अकाउंट से जुड़े सोशल मीडिया वीडियो में नाबालिग बच्चों को बार-बार स्क्रिप्ट और संवाद देकर शामिल किया जा रहा था। शिकायत के मुताबिक, बच्चों से कथित तौर पर अभद्र, अपमानजनक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बातें कहलवाई गईं और इन वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर डिजिटल पहुंच और एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए प्रसारित किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया कि इनमें सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चे भी शामिल थे।
बच्चों की सुरक्षा और सहमति पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल बच्चों की गरिमा, निजता और मानसिक सुरक्षा को लेकर उठाया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी चिंता जताई कि क्या बच्चों को वीडियो में शामिल करने से पहले उनके माता-पिता की उचित और सूचित सहमति ली गई थी। साथ ही, बच्चों को वीडियो के लिए तैयार करने, रिकॉर्ड करने और कंटेंट प्रसारित करने वाले वयस्कों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
NHRC ने संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। एटा के SSP को बच्चों की पहचान कर उनकी सुरक्षा और काउंसलिंग सुनिश्चित करने के साथ-साथ वीडियो की स्क्रिप्टिंग, रिकॉर्डिंग, अपलोडिंग और प्रसारण से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। अगर जांच में संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो पुलिस को FIR दर्ज करने और मामले से जुड़े डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
Meta से भी मांगा जवाब
जिला प्रशासन को बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास के लिए Child Welfare Committee तथा District Child Protection Unit के माध्यम से जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। वहीं, Meta से पूछा गया है कि कथित तौर पर यह कंटेंट बार-बार प्लेटफॉर्म पर कैसे अपलोड और प्रसारित हुआ। आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या इससे किसी तरह की कमाई या व्यावसायिक लाभ हुआ और डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने तथा ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए।
MeitY को प्लेटफॉर्म की चाइल्ड सेफ्टी, ड्यू डिलिजेंस और शिकायत निवारण व्यवस्था की जांच करने को कहा गया है। मामला अभी NHRC के संज्ञान और जांच के स्तर पर है। ऐसे में बच्चों से जुड़े इन आरोपों की पूरी तस्वीर जांच और संबंधित पक्षों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।


