पुणे : पुणे जिले में दूध के दाम में करीब 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। कुछ समय पहले 35 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला दूध अब करीब 45 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। दूध में मिलावट के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्रवाई के बाद मिलावटी दूध की आपूर्ति कम हुई है। इसके चलते बाजार में उपलब्ध दूध की मात्रा घटी और मांग की तुलना में आपूर्ति कम होने से दूध के दाम बढ़ गए।
पुणे जिले में कई किसान खेती के साथ दूध उत्पादन का व्यवसाय करते हैं। पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य खर्च लगातार बढ़ने के कारण कम दूध भाव में इस व्यवसाय से मुनाफा कमाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में दूध के दाम बढ़ने से किसानों को कुछ राहत मिली है।
FDA की मिलावट के खिलाफ कार्रवाई
दूध में मिलावट रोकने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से राज्यभर में जांच और कार्रवाई की जा रही है। दूध संग्रह केंद्रों से लेकर डेयरी, परिवहन, वितरण और बिक्री तक अलग-अलग स्तरों पर जांच की गई। कार्रवाई के दौरान मिलावटी और असुरक्षित दूध जब्त करने के साथ संबंधित प्रतिष्ठानों पर भी कार्रवाई की गई।
आपूर्ति घटी, मांग बनी रही
मिलावटी दूध की आपूर्ति कम होने के बाद बाजार में उपलब्ध दूध की मात्रा पर असर पड़ा है। दूसरी ओर, ग्राहकों की दूध की मांग बनी हुई है। ऐसे में मांग की तुलना में आपूर्ति कम होने से दूध की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। मुंबई के थोक बाजार में भी दूध के दाम बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
35 रुपये से सीधे 45 रुपये तक पहुंचा भाव
पुणे जिले में दूध का भाव करीब 35 रुपये से बढ़कर 45 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। प्रति लीटर 10 रुपये की बढ़ोतरी से दूध उत्पादक किसानों को उत्पादन खर्च निकालने के बाद कुछ अधिक राशि हाथ में मिलने की उम्मीद है। पहले मिलने वाले भाव का बड़ा हिस्सा पशुओं के चारे और पालन-पोषण के खर्च में ही चला जाता था।
दूध में मिलावट रोकने के लिए हुई कार्रवाई का फायदा ईमानदारी से दूध उत्पादन करने वाले किसानों को मिल रहा है, ऐसी भावना भी व्यक्त की जा रही है। मेहनत से उत्पादित दूध का उचित भाव मिलने से दुग्ध व्यवसाय करने वाले किसानों को राहत मिली है। अगर आने वाले समय में दूध की मांग इसी तरह बनी रही और उत्पादन की तुलना में उपलब्धता कम रही, तो दूध के दाम और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, दुग्ध व्यवसाय से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि मौजूदा भाव कायम रहेगा और किसानों को उनके दूध का बेहतर दाम मिलेगा।


