नए जूते की जिद करने वाली एक छोटी बच्ची ने जब पापा की पुरानी चप्पलें देखीं, तो उसकी सोच ही बदल गई…
“पापा, मुझे नए जूते चाहिए!”
आठ साल की सायली सुबह से ही पापा के पीछे पड़ी थी।
स्कूल में उसके लगभग सभी दोस्तों के पास नए जूते आ गए थे। किसी के जूते चमकदार थे, तो किसी के जूतों पर सुंदर डिजाइन बने थे।
सायली के जूते काफी पुराने हो चुके थे। आगे से घिस गए थे और एक तरफ से सिलाई भी निकल रही थी।
पापा रोज कहते,
“बेटा, कुछ दिन और चला लो। फिर नए जूते ले देंगे।”
लेकिन सायली को यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी।
एक दिन गुस्से में उसने पापा से कहा,
“आप मेरे लिए कभी कुछ नहीं खरीदते!”
पापा ने कोई जवाब नहीं दिया।
सायली स्कूल चली गई।
शाम को घर लौटते समय उसने देखा कि पापा अपनी वही पुरानी चप्पलें पहनकर बाहर जा रहे थे।
सायली की नजर उनकी चप्पलों पर पड़ी।
चप्पलों का तलवा काफी घिस चुका था और एक तरफ की पट्टी भी ढीली हो गई थी।
सायली ने पूछा,
“पापा, आपकी चप्पलें इतनी पुरानी हो गई हैं?”
पापा मुस्कुराए और बोले,
“अरे, अभी चल तो रही हैं ना!”
सायली चुप हो गई।
अगले दिन वह अपनी मां के साथ बाजार गई।
एक दुकान पर उसकी नजर अपने पसंदीदा जूतों पर पड़ी। वह उन्हें देखकर कुछ पल रुकी, लेकिन फिर सीधे चप्पलों की दुकान पर चली गई।
सायली ने दुकानदार से कहा,
“अंकल, पापा के लिए अच्छी-सी चप्पल दिखाइए।”
मां ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
सायली ने अपनी छोटी-सी गुल्लक में जमा किए पैसे निकाल लिए।
पैसे थोड़े कम पड़ गए।
मां ने बाकी पैसे दिए और दोनों ने मिलकर पापा के लिए नई चप्पल खरीद ली।
शाम को पापा घर आए।
दरवाजे के पास नई चप्पलों की जोड़ी देखकर उन्होंने पूछा,
“ये किसके लिए हैं?”
सायली दौड़कर आई और बोली,
“आपके लिए!”
पापा कुछ पल उसे देखते रहे।
सायली ने मुस्कुराकर कहा,
“मेरे जूते थोड़े दिन और चल जाएंगे पापा… लेकिन आपकी चप्पलें अब नहीं चलेंगी।”
पापा ने उसे गले लगा लिया।
सायली को उस दिन समझ आया कि अपनी पसंद की चीज पाने की खुशी अलग होती है, लेकिन अपने किसी खास इंसान के चेहरे पर मुस्कान लाने की खुशी उससे कहीं ज्यादा बड़ी होती है।
उस दिन सायली को नए जूते नहीं मिले।
लेकिन पापा की आंखों में दिखी खुशी देखकर उसे लगा—
आज उसे अपने नए जूतों से भी ज्यादा कीमती चीज मिल गई है।


