क्रिकेट की दुनिया में रिकॉर्ड बनते हैं और टूटते भी हैं, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे होते हैं, जिन्हें तोड़ना आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का एक ऐसा ही रिकॉर्ड पिछले 21 सालों से कायम है। खास बात यह है कि विराट कोहली और एबी डिव्हिलियर्स जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के दौर में भी यह रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया। आखिर धोनी ने ऐसा क्या कर दिखाया था?
दरअसल, साल 2005 में आज ही के दिन महेंद्र सिंह धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ जयपुर में ऐसी पारी खेली थी, जिसने क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। 299 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम के लिए धोनी ने महज 145 गेंदों में नाबाद 183 रन बनाए थे। उनकी इस विस्फोटक पारी में 15 चौके और 10 छक्के शामिल थे। धोनी की इस पारी की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक व्यक्तिगत रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। 21 साल बीत जाने के बाद भी कोई विकेटकीपर बल्लेबाज इस आंकड़े को पार नहीं कर सका है।
डी कॉक और लिटन दास भी रिकॉर्ड तोड़ने से चूके
धोनी के इस रिकॉर्ड को चुनौती देने वाले बल्लेबाजों में दक्षिण अफ्रीका के क्विंटन डी कॉक का नाम सबसे आगे रहा। साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 295 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए डी कॉक ने 113 गेंदों में 178 रन बनाए थे। उन्होंने अपनी पारी में 16 चौके और 11 छक्के लगाए थे। हालांकि, वह धोनी के रिकॉर्ड से महज 6 रन पीछे रह गए।
वहीं, साल 2020 में बांग्लादेश के विकेटकीपर बल्लेबाज लिटन दास ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 176 रनों की शानदार पारी खेली थी। लेकिन वह भी धोनी के 183 रनों के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके।
विकेटकीपर के तौर पर वनडे में सबसे बड़ी पारियां
वनडे क्रिकेट में विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में सर्वाधिक व्यक्तिगत रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची इस प्रकार है।
1. एमएस धोनी – 183 रन
2. क्विंटन डी कॉक – 178 रन
3. लिटन दास – 176 रन
4. जेएस मल्होत्रा – 173 रन
5. एडम गिलक्रिस्ट – 172 रन
गिलक्रिस्ट से धोनी तक ऐसे पहुंचा रिकॉर्ड
इस रिकॉर्ड की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज एडम गिलक्रिस्ट से हुई थी। साल 2004 में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने 172 रनों की पारी खेलकर यह रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद 2005 में धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ 148 रन बनाकर गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड तोड़ा। लेकिन उसी साल श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन बनाकर धोनी ने अपने ही रिकॉर्ड को और बड़ा कर दिया।
आज भी धोनी की उस ऐतिहासिक पारी का रिकॉर्ड कायम है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के कई साल बाद भी माही के नाम दर्ज यह उपलब्धि क्रिकेट प्रेमियों को उनकी बल्लेबाजी की याद दिलाती है। मैदान पर उनका बेखौफ अंदाज और मुश्किल लक्ष्य को आसानी से हासिल करने की क्षमता ही उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।


