मुंबई : महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में खाद्य नमूनों की जांच में चार गुना से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही जांच के दौरान हजारों खाद्य नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
FDA के मुताबिक, 1 जून 2026 तक जांच के लिए 13,474 खाद्य नमूने प्राप्त हुए। इनमें से 7,494 नमूनों की जांच पूरी कर ली गई, यानी कुल मामलों में 56 प्रतिशत का निपटारा हुआ। जांच के बाद 4,091 नमूनों को निम्न गुणवत्ता (सब-स्टैंडर्ड) का पाया गया। अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून 2025 तक प्रयोगशालाओं को 9,403 नमूने मिले थे, लेकिन उस समय केवल 1,622 नमूनों की जांच हो सकी थी। यानी निपटारे की दर महज 17 प्रतिशत थी। ऐसे में एक साल के भीतर जांच की रफ्तार में चार गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी विभाग की कार्यप्रणाली में हुए बड़े बदलाव को दर्शाती है।
FDA का कहना है कि उपलब्ध कर्मचारियों का बेहतर इस्तेमाल, प्रयोगशालाओं में उपकरणों का बैच के आधार पर उपयोग, दो शिफ्ट में काम, प्राथमिकता के आधार पर नमूनों की जांच और दूध, दुग्ध उत्पादों, अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों व प्रतिबंधित सामग्री की जांच को प्राथमिकता देने से यह सुधार संभव हो पाया है। विभाग ने बताया कि मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर स्थित FDA प्रयोगशालाओं में खाद्य नमूनों की नियमित जांच की जाती है। साथ ही लंबित मामलों की लगातार समीक्षा और बेहतर कार्ययोजना के चलते जांच प्रक्रिया में पहले की तुलना में काफी तेजी आई है।


