डीजे के शोर से ‘भूकंप’ जैसा एहसास! फडणवीस बोले- बातचीत से निकालेंगे रास्ता

उत्सवों में परंपरा रहे, लेकिन ध्वनि प्रदूषण पर भी लगे लगाम; पुणे पुलिस ने भी जारी किए सख्त नियम

पुणे : त्योहार खुशियां बांटने के लिए होते हैं, लेकिन तेज आवाज वाले डीजे अब कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। डीजे के तेज शोर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार इस समस्या का समाधान बातचीत और लोगों को विश्वास में लेकर निकालेगी।

पुणे में डीजे के खिलाफ आवाज उठाने वाले विद्यानंद बापट के साथ हुई मारपीट की निंदा करते हुए फडणवीस ने कहा कि सण और उत्सवों में किसी भी तरह की हिंसा उचित नहीं है। त्योहारों को अधिक से अधिक पारंपरिक तरीके से मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्सवों के दौरान समय के साथ कुछ ऐसी परंपराएं शुरू हो गई हैं, जिन्हें अचानक पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है। हालांकि, लोगों को साथ लेकर इन पर उचित समाधान निकाला जा सकता है।

‘डीजे की आवाज से नागरिकों को न हो परेशानी’

फडणवीस ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि डीजे की तेज आवाज से नागरिकों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए जैसे भूकंप आ गया हो। सरकार ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए प्रयास कर रही है और आने वाले समय में इस संबंध में ठोस नीति बनाई जाएगी। उन्होंने विद्यानंद बापट को भी सलाह दी कि किसी मुद्दे पर अपनी बात रखते समय सर्वसमावेशक भूमिका अपनानी चाहिए।

पुणे पुलिस ने भी कसी कमर

दहीहंडी और आगामी गणेशोत्सव को देखते हुए पुणे पुलिस ने डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर सख्त नियम जारी किए हैं। पुलिस के मुताबिक, ध्वनि व्यवस्था में ‘चार बेस और चार टॉप’ से अधिक उपकरण लगाने की अनुमति नहीं होगी। पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने गणेश कला क्रीड़ा मंच में हुई समन्वय बैठक में स्पष्ट किया कि निर्धारित डेसिबल सीमा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा प्रेशर मीड, प्लाज्मा और लेजर लाइट के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।

विसर्जन मिरवणूक पर भी पुलिस की नजर

गणेशोत्सव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो, इसके लिए पुलिस ने गणेश मंडलों से सहयोग की अपील की है। विसर्जन जुलूस के दौरान अश्लील कार्यक्रमों को किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं दी जाएगी। पुणे के लक्ष्मी रोड, तिलक रोड और अलका टॉकीज चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुलिस ने मंडलों से सोशल मीडिया और मीडिया पर संयम बरतने तथा अमली पदार्थ विरोधी अभियान में सहयोग करने की भी अपील की है।

त्योहारों में उत्साह और उमंग जरूरी है, लेकिन उसके साथ बुजुर्गों, बच्चों, मरीजों और आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी का भी ध्यान रखना उतना ही जरूरी है। अब देखना होगा कि बातचीत और सख्त नियमों के बीच सरकार डीजे के शोर की इस समस्या का स्थायी समाधान कैसे निकालती है।

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