झारखंड : जेल की चारदीवारी के भीतर सजा काट रहे कुछ कैदियों के लिए अब जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने का रास्ता खुल सकता है। झारखंड सरकार ने राज्य के चार प्रमुख केंद्रीय कारागृहों में ‘ओपन और सेमी-ओपन बैरक सिस्टम’ लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत अच्छे आचरण वाले और जेल के नियमों का पालन करने वाले चुनिंदा कैदियों को दिन में जेल से बाहर जाकर काम करने और शाम को वापस जेल लौटने की अनुमति दी जाएगी।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कैदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार, कौशल और जिम्मेदारी के जरिए समाज में दोबारा स्थापित करना है। काम करने से कैदियों को आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार की आर्थिक मदद करने का अवसर भी मिल सकता है।
चार जेलों में शुरू होगी व्यवस्था
इस योजना में बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल, रांची; जयप्रकाश नारायण सेंट्रल जेल, हजारीबाग; घाघीडीह सेंट्रल जेल, पूर्वी सिंहभूम और दुमका सेंट्रल जेल को शामिल किया गया है। इन जेलों की कुछ बैरकों और सेल्स को ओपन या सेमी-ओपन बैरक में बदला जाएगा।
सुबह काम के लिए बाहर, शाम को जेल में वापसी
नई व्यवस्था के तहत पात्र कैदियों को सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच जेल से बाहर जाकर काम करने की अनुमति दी जा सकती है। दिनभर काम करने के बाद उन्हें निर्धारित समय पर वापस जेल लौटना होगा। हालांकि, यह सुविधा सभी कैदियों के लिए नहीं होगी। कौन-सा कैदी बाहर जाकर काम कर सकता है, उसे कितने समय के लिए बाहर जाने की अनुमति होगी और उसकी निगरानी कैसे की जाएगी, इसके लिए अलग एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की जाएगी।
अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को प्राथमिकता
इस व्यवस्था में कैदी का व्यवहार और जेल में उसका रिकॉर्ड सबसे महत्वपूर्ण होगा। जो कैदी लगातार जेल के नियमों का पालन करते हैं और जिनमें सुधार के सकारात्मक संकेत दिखाई देते हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जा सकती है। काम के तौर पर निर्माण, सेवा, उत्पादन, हस्तकला और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य रोजगार के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इससे कैदियों में आत्मविश्वास, मेहनत और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की कोशिश होगी।
सजा के बाद की जिंदगी के लिए तैयारी
जेल से बाहर निकलने के बाद सामान्य जिंदगी में लौटना कई कैदियों के लिए आसान नहीं होता। रोजगार की कमी और समाज से दूरी उनके सामने बड़ी चुनौती बन सकती है। ऐसे में जेल में रहते हुए काम करने का अनुभव उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर सकता है। नियमित काम और कमाई के साथ परिवार से जुड़ाव भी मजबूत हो सकता है। यही वजह है कि ओपन जेल की यह व्यवस्था सजा से ज्यादा सुधार और पुनर्वास पर जोर देने वाली पहल के रूप में देखी जा रही है। झारखंड सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। अब इस व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है और इसका कैदियों के जीवन पर कितना सकारात्मक असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


