देश में चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डाला है। हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार के मुताबिक, चीनी उत्पादन में कमी, त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग, खराब मौसम और वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी इसकी प्रमुख वजहें हैं।
इथेनॉल को क्यों नहीं माना वजह ?
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक, 2022-23 में कुल चीनी उत्पादन का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जाता था। वहीं 2025-26 में यह हिस्सा घटकर करीब 9 प्रतिशत रह गया है। इसके अलावा, देश में बनने वाले इथेनॉल का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अब अनाज से तैयार किया जा रहा है। इसमें मक्के का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में सरकार का कहना है कि चीनी की मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
फिर क्यों महंगी हुई चीनी?
सरकार के अनुसार, इस साल देश में चीनी का उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहा है। दूसरी ओर, त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ने लगी है। कई इलाकों में बारिश, ओलावृष्टि और मौसम में बदलाव के कारण गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा, जिसका असर चीनी उत्पादन पर पड़ा। भारत ही नहीं, दुनियाभर में चीनी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 33 लाख मीट्रिक टन चीनी की कमी होने का अनुमान है। इसके अलावा कुछ व्यापारियों और उद्योग से जुड़े लोगों द्वारा जमाखोरी और सट्टेबाजी किए जाने की बात भी सरकार ने कही है।
उत्पादन के अनुमान में बड़ी गिरावट
सरकार के मुताबिक, मौजूदा चीनी सीजन में देश में करीब 306 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। शुरुआत में यह आंकड़ा करीब 343 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान लगाया गया था। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में उत्पादन काफी कम रहने की संभावना है। हालांकि, सरकार का कहना है कि उत्पादन में कमी के बावजूद घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक मौजूद है। अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू बाजार की जरूरत पूरी की जा सकती है।
कीमतों पर लगाम के लिए सरकार के कदम
चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने चीनी के स्टॉक पर सीमा लगाई है। इसके साथ ही बिना शुल्क के चीनी आयात की अनुमति भी दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम होगा और आम लोगों को राहत मिल सकती है।
इथेनॉल से चीनी उद्योग को क्या फायदा?
सरकार के मुताबिक, इथेनॉल कार्यक्रम से चीनी उद्योग को आर्थिक सहारा मिला है। जब चीनी का उत्पादन जरूरत से ज्यादा होता है, तो अतिरिक्त चीनी का बड़ा स्टॉक कारखानों में जमा हो जाता है। इससे कारखानों की पूंजी स्टॉक में फंस जाती है और किसानों को गन्ने का भुगतान करने में भी देरी हो सकती है। ऐसे में अतिरिक्त चीनी का कुछ हिस्सा इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। इससे अतिरिक्त स्टॉक कम होता है और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसका फायदा गन्ना किसानों को भी मिलता है।
आगे क्या होगा?
चीनी की मौजूदा कीमतों के पीछे उत्पादन में कमी से लेकर वैश्विक बाजार तक कई कारण हैं। सरकार की ओर से आयात की अनुमति और स्टॉक सीमा जैसे कदम उठाए गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार में सप्लाई बढ़ती है तो चीनी की कीमतों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।


