नई दिल्ली : त्योहारों के मौसम में रसोई के बजट को लेकर परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने क्रूड और रिफाइंड खाद्य तेल पर आयात शुल्क में कटौती की है। सरकार ने कंपनियों से कहा है कि इस कटौती का फायदा सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाए और खाद्य तेल की MRP कम की जाए।
सरकार के फैसले के मुताबिक, क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी गई है। वहीं, रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल पर शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत किया गया है। इसके अलावा क्रूड सोयाबीन ऑयल और क्रूड पाम ऑयल पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। रिफाइंड सनफ्लावर ऑयल और रिफाइंड पाम ऑयल पर शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत किया गया है।
ग्राहकों तक पहुंचेगा शुल्क कटौती का फायदा
आयात शुल्क कम होने से कंपनियों की लागत घट सकती है। सरकार चाहती है कि इस कमी का फायदा केवल कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा लाभ आम ग्राहकों को भी मिले। इसी वजह से खाद्य तेल उद्योग से जुड़ी संस्थाओं को सलाह जारी कर MRP में कमी करने के निर्देश दिए गए हैं।
त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की कीमतों का असर सीधे घर के मासिक बजट पर पड़ता है। ऐसे में सरकार के इस फैसले से आने वाले दिनों में ग्राहकों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार में कीमतें वास्तव में कितनी कम होती हैं, यह कंपनियों की ओर से शुल्क कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने पर निर्भर करेगा।
खाद्य तेल के आयात पर भी बढ़ा खर्च
Solvent Extractors’ Association of India (SEA) के अनुसार, चालू मार्केटिंग वर्ष में भारत का खाद्य तेल आयात खर्च करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 1.75 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। बढ़े हुए आयात और रुपये के मुकाबले डॉलर की स्थिति को इसके प्रमुख कारणों में बताया गया है। फिलहाल, आयात शुल्क में हुई इस कटौती के बाद नजर इस बात पर है कि कंपनियां अपनी MRP में कितनी कमी करती हैं और इसका असर बाजार में खाद्य तेल की कीमतों पर कितना दिखाई देता है।


