कारगिल में पति शहीद, फिर राजनीति में कदम! सुधा यादव को कभी नरेंद्र मोदी ने दिया था चुनाव लड़ने का प्रस्ताव

हरियाणा की पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव अब कर्नाटक की नई राज्यपाल बनीं। पति को खोने के बाद उन्होंने संभाली परिवार की जिम्मेदारी और राजनीति में बनाई अपनी अलग पहचान।

1999 का कारगिल युद्ध देश के लिए कई वीरों की शहादत लेकर आया। इन्हीं वीरों में एक नाम सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी सुखबीर सिंह यादव का भी था। उनके शहीद होने के बाद उनकी पत्नी डॉ. सुधा यादव के सामने परिवार की जिम्मेदारी थी। लेकिन जिंदगी ने उनके लिए एक नया रास्ता भी खोला। आज वही सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल बनी हैं। उनकी कहानी संघर्ष, हिम्मत और राजनीति में अपनी पहचान बनाने की मिसाल है।

कैसे हुई राजनीति में एंट्री?

यह कहानी साल 1999 की है। उस समय नरेंद्र मोदी हरियाणा में भाजपा के प्रभारी थे। लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी ऐसे उम्मीदवार की तलाश कर रही थी, जिनके पास संघर्ष की अपनी कहानी और जनता से जुड़ने की क्षमता हो। इसी दौरान शहीद सैनिक की पत्नी को चुनाव लड़ाने का विचार सामने आया। भाजपा नेता ओपी धनखड़ के माध्यम से डॉ. सुधा यादव का नाम सामने आया। उस समय सुधा यादव हरियाणा के शिक्षा विभाग में प्राध्यापिका के रूप में काम कर रही थीं। पति की शहादत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर थी। नरेंद्र मोदी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद सुधा यादव ने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया।

 पहला चुनाव और बड़ी जीत

भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए सुधा यादव ने 1999 में शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार राव इंद्रजीत सिंह को करीब 1.39 लाख मतों से हराया। इस जीत ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में पहचान दिलाई। वह 1999 से 2004 तक लोकसभा सांसद रहीं। इसके बाद 2004 और 2009 के चुनावों में भी उन्होंने किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें दोबारा जीत नहीं मिली। हालांकि, चुनावी हार के बावजूद पार्टी में उनकी भूमिका बनी रही।

 संगठन में भी निभाईं अहम जिम्मेदारियां

डॉ. सुधा यादव का राजनीतिक सफर केवल सांसद बनने तक सीमित नहीं रहा। साल 2015 में उन्हें भाजपा के ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद 2019 से 2022 तक उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य के रूप में काम किया। 17 अगस्त 2022 को उन्हें भाजपा के संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया। इस तरह उन्होंने पार्टी संगठन में भी अपनी जगह मजबूत की।

अब कर्नाटक के राज्यपाल की जिम्मेदारी

एक समय पति की शहादत के बाद जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाली सुधा यादव ने शिक्षा से लेकर संसद और पार्टी संगठन तक का सफर तय किया। अब कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी उनके सार्वजनिक जीवन का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनकी कहानी सिर्फ एक राजनीतिक नियुक्ति की खबर नहीं है, बल्कि उस महिला के सफर की भी कहानी है, जिसने निजी दुख के बीच खुद को संभाला और सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई।

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