नई दिल्ली : खेल के मैदान पर अनुशासन, मेहनत और देश के प्रति समर्पण का शानदार उदाहरण पेश करते हुए भारतीय रक्षा बलों के खिलाड़ियों ने 2026 एशियन गेम्स में इतिहास रच दिया। जापान में आयोजित इन खेलों में सर्विसेज के खिलाड़ियों ने कुल 27 पदक अपने नाम किए। इस उपलब्धि के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उनके प्रदर्शन की सराहना की।
27 पदकों के साथ भारत की सफलता में अहम योगदान
एशियन गेम्स में रक्षा बलों के 92 खिलाड़ियों ने 19 खेल विधाओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। खिलाड़ियों ने 6 गोल्ड, 11 सिल्वर और 10 ब्रॉन्ज मेडल जीते। यह सर्विसेज का एशियन गेम्स में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इन खिलाड़ियों ने भारत के कुल पदकों में 32 प्रतिशत और गोल्ड मेडल में 28.57 प्रतिशत का योगदान दिया। पूरे भारतीय दल ने प्रतियोगिता में 85 पदक जीते, जिनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।
खिलाड़ियों की मेहनत को मिला सम्मान
खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पदक जीतने के पीछे केवल मैदान पर किया गया प्रदर्शन नहीं, बल्कि लंबे समय तक की गई मेहनत, सुबह-सुबह का अभ्यास, चोटों से उबरना और परिवार से दूर रहकर लक्ष्य के लिए लगातार प्रयास करना भी शामिल है। उन्होंने उन खिलाड़ियों का भी हौसला बढ़ाया, जो प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बावजूद पदक नहीं जीत सके। राजनाथ सिंह ने कहा कि असली हार तब होती है, जब कोई हार मान लेता है। हर खिलाड़ी ने किसी न किसी रूप में देश और रक्षा बलों का सम्मान बढ़ाया है।
नायब सूबेदार नीरू धांडा ने रचा इतिहास
सर्विसेज के खिलाड़ियों में नायब सूबेदार नीरू धांडा का प्रदर्शन खास रहा। उन्होंने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता। वह एशियन गेम्स में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। वहीं, नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा। वह एशियन गेम्स के एक संस्करण में तीन व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष ट्रैक एंड फील्ड खिलाड़ी बने। हवलदार सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड समय के साथ सिल्वर मेडल जीता। उनकी इस उपलब्धि से एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में भारत का 44 साल का इंतजार खत्म हुआ। इसके अलावा, नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे ने पुरुष हाई जंप में भारत को 56 साल बाद ऐतिहासिक पदक दिलाया।
खिलाड़ियों को तैयार करने में टीम की अहम भूमिका
रक्षा मंत्री ने मिशन ओलंपिक विंग की भूमिका की भी सराहना की। इस विंग के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने, उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। उन्होंने कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ, सहयोगी स्टाफ और खिलाड़ियों के परिवारों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी को चैंपियन बनाने में कई लोगों की मेहनत शामिल होती है।
अब लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 की तैयारी
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश में खेल सुविधाओं और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। लक्ष्य केवल खेलों में भागीदारी बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक खेल जगत की अग्रणी ताकत बनाना है। उन्होंने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ से लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए अभी से व्यवस्थित तैयारी करने और पहले से बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सर्विसेज के खिलाड़ियों की यह सफलता दिखाती है कि अनुशासन, लगातार मेहनत और मजबूत टीम भावना के दम पर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का गौरव और बढ़ाया जा सकता है।


