Russia-Ukraine War : रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन को बड़ा तकनीकी झटका लगने की खबर है। Starlink की कथित पाबंदियों से ड्रोन अभियान प्रभावित होने की आशंका है। इसी बीच कीव पर मिसाइल हमले और ब्रिटेन से मिलने वाली एयर डिफेंस सहायता ने युद्ध की चिंता बढ़ा दी है।
Starlink की पाबंदी से यूक्रेन की बढ़ी मुश्किलें?
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में अब तकनीक की भूमिका भी बेहद अहम हो गई है। इसी बीच अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। खबरों के मुताबिक, Starlink ने यूक्रेन के सैन्य ड्रोन की गति पर कुछ सीमाएं लगाई हैं। इससे यूक्रेनी सेना की ड्रोन गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के सलाहकार सर्जी बेशकरेस्तनोव के अनुसार, इन तकनीकी पाबंदियों के कारण यूक्रेनी ड्रोन की रफ्तार कम हो सकती है। इससे रूसी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए उन्हें निशाना बनाना आसान होने का खतरा है। यूक्रेन की सेना लंबी दूरी के ड्रोन अभियानों और सैन्य संचार के लिए Starlink की सेवाओं का इस्तेमाल करती रही है। ऐसे में इस सेवा से जुड़ा कोई भी बदलाव युद्ध के मैदान में उसकी रणनीति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इन पाबंदियों के पीछे किसी राजनीतिक समझौते की भूमिका होने की बात फिलहाल एक आशंका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
कीव पर मिसाइलों की बारिश, 5 लोगों की मौत
एक तरफ यूक्रेन तकनीकी चुनौतियों से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ रूसी हमलों ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खबरों के मुताबिक, रूस ने कीव, उसके आसपास के इलाकों और खारकीव को निशाना बनाते हुए 39 बैलिस्टिक मिसाइलें और 120 से अधिक विस्फोटक ड्रोन दागे। इन हमलों में पांच लोगों की मौत और 36 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। ऊर्जा और बिजली से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने के कारण करीब छह लाख घरों की बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी खबर है। इन हमलों का असर केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती खड़ी हो गई है। ठंड और कठिन परिस्थितियों के बीच बिजली की कमी लोगों की परेशानी और बढ़ा सकती है।
खुफिया जानकारी में देरी पर जेलेंस्की की नाराजगी
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूसी मिसाइल हमलों को लेकर समय पर चेतावनी नहीं मिलने पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, पश्चिमी सहयोगियों की ओर से शुरुआती हमले की जानकारी समय पर नहीं मिल पाई। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुफिया जानकारी साझा करना बंद किए जाने की बात से इनकार किया है। ऐसे में यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य और खुफिया सहायता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ब्रिटेन से मिलेगी आधुनिक एयर डिफेंस प्रणाली
रूसी हमलों के बीच जेलेंस्की ब्रिटेन पहुंचे, जहां उन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय से मुलाकात की। इसके अलावा ब्रिटिश नेतृत्व के साथ भी उनकी बातचीत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन ने यूक्रेन को आधुनिक एयर डिफेंस प्रणाली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसका उद्देश्य रूसी मिसाइलों और ड्रोन हमलों से यूक्रेन के शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा मजबूत करना है। युद्ध के बीच यूक्रेन के लिए ऐसी सहायता बेहद अहम मानी जा रही है। क्योंकि लगातार हो रहे हमलों से ऊर्जा व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
यूक्रेन का 277 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वापस लेने का दावा
यूक्रेनी सेना ने दावा किया है कि उसने गर्मियों में शुरू किए गए सैन्य अभियान के दौरान पूर्वी यूक्रेन में करीब 277 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को रूसी सेना के कब्जे से वापस हासिल किया है। दूसरी ओर, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक ही रात में रूस के विभिन्न हिस्सों, क्रीमिया और आजोव सागर के आसपास यूक्रेन के 902 ड्रोन मार गिराए। इनमें से 493 ड्रोन मॉस्को की दिशा में आ रहे थे। मॉस्को के महापौर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, इनमें से 180 ड्रोन शहर के बाहरी इलाके में ही नष्ट कर दिए गए। हालांकि, युद्ध के दौरान दोनों पक्षों की ओर से किए जाने वाले सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना जरूरी है।
क्या अमेरिका-रूस की डील का Starlink पर पड़ा असर?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और रूस के बीच कथित समझौते को लेकर भी चर्चा हो रही है। उपलब्ध जानकारी में दावा किया गया है कि रूस अमेरिका को डीजल की आपूर्ति करेगा और अमेरिकी पक्ष ने वर्ष 2027 तक कुछ प्रतिबंधों में राहत दी है। इसी समझौते को Starlink की कथित पाबंदियों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी राजनीतिक या आर्थिक डील के कारण ही यूक्रेन के ड्रोन पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
फिलहाल, यूक्रेन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर रूसी हमलों से शहरों और ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा करनी है, तो दूसरी ओर सैन्य तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर निर्भरता के बीच अपनी रणनीति को मजबूत बनाए रखना है। आने वाले दिनों में Starlink की भूमिका और पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य सहायता इस युद्ध की दिशा पर कितना असर डालती है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।


