नागपुर : आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए अब शिक्षा के साथ-साथ करियर, व्यक्तित्व विकास और भविष्य की तैयारी के नए अवसर उपलब्ध होने जा रहे हैं। महाराष्ट्र के आदिवासी विकास विभाग के अधीन संचालित 490 सरकारी बालक-बालिका छात्रावासों के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कै. लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था, नागपुर और आदिवासी विकास विभाग, महाराष्ट्र शासन के बीच सामंजस्य करार किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को उनकी रुचि, क्षमता और जरूरत के अनुसार सही मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि इस पूरे उपक्रम के लिए सरकार या विद्यार्थियों से किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। संस्था सामाजिक जिम्मेदारी के तहत यह कार्य स्वेच्छा से और नि:शुल्क करेगी। संस्था के अध्यक्ष अतुल शिरोडकर ने यह जानकारी दी।
आंदोलन की पृष्ठभूमि में संस्था ने स्पष्ट की भूमिका
आदिवासी छात्रावासों के विद्यार्थियों के आंदोलन की पृष्ठभूमि में संस्था ने इस सामंजस्य करार को लेकर अपनी भूमिका स्पष्ट की है। संस्था का कहना है कि यह पहल किसी राजनीतिक या व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। कै. लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था वर्ष 1996 से सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में काम कर रही है। संस्था के अनुसार, वर्तमान में विदर्भ के आदिवासी क्षेत्रों में 1,328 एकलव्य एकल विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। करीब 1,495 शिक्षक और पर्यवेक्षक विदर्भ के 11 जिलों के लगभग 1,200 गांवों में शिक्षा के महत्व और सरकारी योजनाओं को लेकर स्थानीय लोगों को मार्गदर्शन दे रहे हैं। इसी कार्य को आगे बढ़ाते हुए अब छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रों के लिए होंगे कई उपयोगी उपक्रम
सामंजस्य करार के तहत छात्रावासों में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें करियर मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास, उद्योग जगत से जुड़ी कार्यशालाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्पोकन इंग्लिश, आर्थिक साक्षरता और संविधान अध्ययन कक्षाएं प्रमुख हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को शैक्षणिक योजनाओं और छात्रवृत्तियों की जानकारी, विद्यार्थी विकास मेले, व्यसनमुक्ति संबंधी मार्गदर्शन, महापुरुषों की जयंती पर कार्यक्रम, विभिन्न प्रतियोगिताएं, शैक्षणिक सहली एवं पर्यटन, सेवा प्रकल्प और अनुसूचित जनजाति के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। विद्यार्थियों की नियमित स्वास्थ्य जांच का भी आयोजन किया जाएगा।
विद्यार्थियों से सीधे संवाद पर रहेगा जोर
इस पहल की खास बात यह होगी कि संस्था के कार्यकर्ता विद्यार्थियों से प्रत्यक्ष संवाद करेंगे। छात्र अपनी व्यक्तिगत अथवा छात्रावास से जुड़ी समस्याएं सामने रख सकेंगे और उन्हें उचित मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जाएगा। उपक्रमों के संचालन के दौरान संबंधित अपर आयुक्त, परियोजना अधिकारी और छात्रावास अधीक्षक के साथ समन्वय किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनकी व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी संस्था ने स्वीकार की है।
सिर्फ पढ़ाई नहीं, आत्मविश्वास भी जरूरी
ग्रामीण और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए सिर्फ किताबों तक सीमित शिक्षा पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपने भविष्य को लेकर सही दिशा, आत्मविश्वास, कौशल और विभिन्न करियर अवसरों की जानकारी मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के साथ यह पहल शुरू की गई है। संस्था के अध्यक्ष अतुल शिरोडकर के अनुसार, शासन की मान्यता के बाद 9 अगस्त 2025 को सामंजस्य करार किया गया। आदिवासी विकास विभाग के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि करार में निर्धारित सभी उपक्रम प्रभावी और संवेदनशील तरीके से लागू करने के लिए संस्था प्रतिबद्ध है


