नागपुर : भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) नागपुर के निदेशक डॉ. भीमराया मेत्री ने संस्थान को अगले पांच वर्षों में राष्ट्रीय स्तर से आगे बढ़ाकर वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा है। अपने दूसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आईआईएम नागपुर का नाम देश के प्रतिष्ठित आईआईएम अहमदाबाद, इंदौर, कोझिकोड और मुंबई के साथ लिया जाना चाहिए। इसके लिए संस्थान ने वर्ष 2026 से 2031 तक का रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है।
डॉ. मेत्री ने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए संस्थान में बड़े पैमाने पर आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। अगले डेढ़ से दो वर्षों में यह कार्य पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा पुणे के मोशी क्षेत्र में 70 एकड़ भूमि मात्र एक रुपये की नाममात्र लीज पर उपलब्ध कराए जाने से आईआईएम नागपुर के दूसरे पूर्ण विकसित परिसर का रास्ता साफ हो गया है। इसके निर्माण के बाद आईआईएम नागपुर देश का ऐसा पहला आईआईएम होगा, जिसके दो पूर्ण विकसित परिसर होंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान की आगामी यात्रा का आधार “फ्रॉम इंडिया टू द वर्ल्ड” रहेगा। इसी दिशा में आईआईएम नागपुर को विश्व के शीर्ष 100 बिजनेस स्कूलों और एशिया के शीर्ष 10 संस्थानों में शामिल कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।डॉ. मेत्री ने बताया कि ‘स्ट्रेटेजिक रोडमैप 2026-31’ के तहत मल्टी-कैंपस विस्तार, एग्जीक्यूटिव एजुकेशन में देश के शीर्ष तीन संस्थानों में स्थान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रबंधन शिक्षा, भारत-केंद्रित शोध, ऊर्जा एवं जलवायु नेतृत्व, उद्यमिता को बढ़ावा तथा महाराष्ट्र और विदर्भ के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जैसे लक्ष्य तय किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि संस्थान अगले वर्ष एमबीए इन ह्यूमन रिसोर्स (एचआर) कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। शुरुआत में इसमें 40 से 60 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। उनके अनुसार, एचआर के छात्र आगे चलकर विभिन्न कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं, जिससे संस्थान के प्लेसमेंट को भी मजबूती मिलती है। डॉ. मेत्री ने कहा कि एग्जीक्यूटिव एजुकेशन को और मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। इसके तहत 100 क्षमता वाला डबल-बेड एग्जीक्यूटिव गेस्ट हाउस, 300 क्षमता का नया छात्रावास, 600 क्षमता का बहुउद्देशीय हॉल, 7 से 8 नए क्लासरूम, अलग लाइब्रेरी भवन तथा निदेशक आवास का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले स्थान की कमी के कारण एग्जीक्यूटिव एजुकेशन कार्यक्रम प्रभावित हो रहे थे, जबकि इसी क्षेत्र से पिछले वर्ष संस्थान को 42.5 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। नए निर्माण कार्यों से इस आय में और वृद्धि की उम्मीद है।
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए डॉ. मेत्री ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को 35 से 40 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लिए ऊर्जा प्रबंधन और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए आईआईएम नागपुर ऊर्जा प्रबंधन पर आधारित एमबीए कार्यक्रम को भी बढ़ावा दे रहा है। उनका कहना था कि महाराष्ट्र में सर्वाधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आने के कारण राज्य में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और आईआईएम नागपुर राज्य तथा केंद्र सरकार के विकास लक्ष्यों में एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन की भूमिका निभाना चाहता है।


