मुंबई : भारतीय कॉर्पोरेट जगत में बड़े निवेश की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। अदानी समूह ने आने वाले वर्षों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में करीब 125 अरब डॉलर यानी लगभग ₹12 लाख करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। इतनी बड़ी रकम के निवेश से सिर्फ अदानी समूह की कंपनियों को ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े ठेकेदारों, इंजीनियरिंग कंपनियों, उपकरण निर्माताओं और टेक्नोलॉजी सप्लायर्स को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
एक साल में ₹1.53 लाख करोड़ का कैपेक्स
अदानी समूह ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान करीब ₹1.53 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) किया। इसे किसी भारतीय कॉर्पोरेट समूह की ओर से एक साल में किया गया सबसे बड़ा पूंजीगत खर्च बताया जा रहा है। खास बात यह है कि इस खर्च का करीब 80 फीसदी हिस्सा बाहरी विक्रेताओं के जरिए किया गया। जानकारी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में समूह करीब ₹2.1 लाख करोड़ का कैपेक्स करने की तैयारी में है। वहीं, अगले पांच वर्षों में अलग-अलग कारोबारों में करीब 125 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बताई गई है।
सप्लायर्स के लिए बढ़ सकती हैं ऑर्डर की संभावनाएं
अदानी समूह के बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इंजीनियरिंग, पावर ट्रांसमिशन, कंस्ट्रक्शन और औद्योगिक उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। यही वजह है कि अदानी समूह से संभावित ऑर्डर मिलने वाली कुछ कंपनियों के शेयरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। पिछले कुछ समय में Hitachi Energy India, Cemindia Projects, GE Vernova T&D India, BHEL और PSP Projects जैसे शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। हालांकि, शेयरों में तेजी का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में इन कंपनियों को निश्चित तौर पर अदानी समूह से ऑर्डर मिलेंगे।
Vendor नहीं, Strategic Partner बनाने की सोच
अदानी समूह की रणनीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। समूह के CFO जुगेषिंदर ‘रॉबी’ सिंह के अनुसार, बड़े पैमाने पर बढ़ रहे कैपेक्स को पूरा करने के लिए बाहरी कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में इन कंपनियों को सिर्फ Vendor के रूप में देखने के बजाय Strategic Partner के तौर पर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी कंपनियों का नेटवर्क तैयार करना है, जो भविष्य में बड़े स्तर पर इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़ी क्षमताएं विकसित कर सकें।
Apple जैसी रणनीति की झलक?
अदानी समूह का यह मॉडल कुछ हद तक Apple के Extended Enterprise Model जैसा माना जा रहा है। इस तरह के मॉडल में मुख्य कंपनी डिजाइन, तकनीक और ग्राहक अनुभव जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर नियंत्रण रखती है, जबकि विशेषज्ञ कंपनियां उत्पादन और अन्य तकनीकी क्षमताएं उपलब्ध कराती हैं। अदानी समूह के लिए इसका फायदा यह हो सकता है कि हर क्षमता को खुद विकसित करने के बजाय विशेषज्ञ कंपनियों की मदद से बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जा सके। वहीं, पार्टनर कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट्स, निवेश और लंबे समय के कारोबार का अवसर मिल सकता है।
लेकिन जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
इस पूरी तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। अगर किसी कंपनी की कमाई किसी एक बड़े ग्राहक या समूह पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाती है, तो Concentration Risk बढ़ सकता है। इसके अलावा बड़ा ऑर्डर बुक होना हमेशा ज्यादा मुनाफे या बेहतर कैश फ्लो की गारंटी नहीं देता। इसलिए निवेशकों के लिए सिर्फ संभावित ऑर्डर देखकर किसी शेयर में फैसला लेना उचित नहीं होगा। कंपनी की वित्तीय स्थिति, कर्ज, ऑर्डर की गुणवत्ता, मार्जिन और कैश फ्लो जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।
बड़ी तस्वीर क्या है?
अगर अदानी समूह की यह निवेश योजना तय समय पर आगे बढ़ती है और उससे जुड़ी कंपनियां बड़े ऑर्डर्स को सफलतापूर्वक पूरा कर पाती हैं, तो इसका असर केवल अदानी समूह तक सीमित नहीं रह सकता। इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़ी कई कंपनियों के कारोबार को इससे गति मिल सकती है। यानी आने वाले वर्षों में ₹12 लाख करोड़ का यह मेगा कैपेक्स प्लान भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में कई नई कारोबारी कहानियों को जन्म दे सकता है। हालांकि, निवेश से पहले जोखिम और कंपनी के मूलभूत आंकड़ों को समझना उतना ही जरूरी रहेगा।


