भारतीय शेयर बाजार में 6 अक्टूबर को कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में तेजी देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह बाजार नियामक SEBI के क्लोजिंग ऑक्शन से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावित खबर मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI कम से कम एक साल तक डेरिवेटिव्स की सेटलमेंट कीमत तय करने के लिए क्लोजिंग ऑक्शन का इस्तेमाल रोक सकता है।
अगस्त में SEBI ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस से जुड़े शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS की नई व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत कारोबारी दिन के अंत में होने वाली छोटी नीलामी के जरिए शेयर की क्लोजिंग कीमत तय की जाती है। हालांकि, एक्सपायरी वाले दिनों में डेरिवेटिव्स की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव देखने के बाद इस व्यवस्था की समीक्षा शुरू हुई। अब सामने आई जानकारी के अनुसार, डेरिवेटिव्स की कीमत तय करने के लिए ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस यानी VWAP का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, कम लिक्विडिटी वाले कैश मार्केट के शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन की व्यवस्था जारी रह सकती है।
इस संभावित बदलाव का असर शेयर बाजार में भी नजर आया। 6 अक्टूबर सुबह 9:45 बजे Nifty Capital Markets Index करीब 1.2 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। Motilal Oswal Financial Services, BSE, Angel One और Groww के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। वहीं, हाल ही में लिस्ट हुए NSE के शेयर करीब 1.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,746 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। SEBI ने सप्ताहांत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया था कि पिछले महीने जारी किए गए कंसल्टेशन पेपर पर उसे करीब 20,000 सुझाव मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, नियामक इस व्यवस्था में बदलाव को इसी महीने के अंत तक लागू कर सकता है।
SEBI ने सितंबर में CAS के दौरान इंडेक्स की इंडिकेटिव वैल्यू प्रकाशित नहीं करने का प्रस्ताव भी रखा था। हालांकि, इस पर मिले फीडबैक में इंडेक्स की जानकारी बनाए रखने की बात सामने आई। बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे कीमतों में पारदर्शिता और बेहतर प्राइस डिस्कवरी से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। फिलहाल बाजार की नजर SEBI के अंतिम फैसले पर है। अगर नियमों में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर एक्सपायरी के दौरान डेरिवेटिव्स की कीमत तय होने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।


