नागपुर : महाराष्ट्र में श्रम शिक्षा, शोध और कौशल विकास को नई गति देने के उद्देश्य से राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (RTMNU) और नारायण मेघाजी लोखंडे महाराष्ट्र श्रम विज्ञान संस्थान के बीच सोमवार को मंत्रालय में सामंजस्य करार (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। कामगार मंत्री एड. आकाश फुंडकर की प्रमुख उपस्थिति में हुए इस समझौते से उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद जताई गई है।
करार के बाद मंत्री फुंडकर ने कहा कि आज के बदलते औद्योगिक माहौल में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। छात्रों और युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने हेतु व्यावहारिक और कौशल आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसी दिशा में दोनों संस्थाएं मिलकर अल्पकालीन प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करेंगी। उन्होंने बताया कि उद्योग क्षेत्र की बदलती मांग को ध्यान में रखते हुए नए पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही प्राध्यापकों का आदान-प्रदान, संयुक्त शोध, कार्यशालाएं, परिसंवाद और जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। श्रम कल्याण, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध, मानव संसाधन विकास और रोजगारोन्मुख कौशल निर्माण जैसे विषयों पर विशेष रूप से काम किया जाएगा।
यह सामंजस्य करार प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए लागू रहेगा। आपसी सहमति से इसकी अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकेगी। विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों को शैक्षणिक मान्यता, गुणवत्ता नियंत्रण और सफल विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान करेगा, जबकि महाराष्ट्र श्रम विज्ञान संस्थान प्रशिक्षण, अधोसंरचना और शैक्षणिक प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाएगा। संयुक्त निगरानी समिति के माध्यम से पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता की नियमित समीक्षा की जाएगी। शोध कार्यों से उत्पन्न होने वाले बौद्धिक संपदा अधिकारों के संबंध में भी दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से कार्य करेंगी।
इस अवसर पर RTMNU की कुलगुरू डॉ. मनाली क्षीरसागर, आजीवन अध्ययन एवं विस्तार विभाग के संचालक डॉ. समित माहोरे, महाराष्ट्र श्रम विज्ञान संस्थान की संचालिका तथा उपसचिव रोशनी कदम पाटील, उपसचिव स्वप्नील कापडणीस, उपसंचालक डॉ. अतुल नऊबदे तथा दोनों संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


