भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट की तस्वीर सिर्फ Nifty के आंकड़ों से समझना मुश्किल है। Nifty 500 के आंकड़े बाजार में चल रही कमजोरी की एक बड़ी तस्वीर सामने रख रहे हैं। इस इंडेक्स में शामिल करीब आधे शेयर अपने ऑल टाइम हाई से 30 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुके हैं।
आंकड़ों के मुताबिक Nifty 500 के 500 शेयरों में से 252 शेयर यानी 50.4 फीसदी अपने उच्चतम स्तर से कम से कम 30 फीसदी नीचे हैं। वहीं 167 शेयर यानी 33.4 फीसदी में 40 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा चिंता वाली बात यह है कि 102 शेयरों यानी करीब हर पांच में से एक शेयर ने अपने ऑल टाइम हाई से 50 फीसदी से ज्यादा मूल्य गंवा दिया है। बाजार की चौड़ाई पर नजर डालें तो स्थिति और स्पष्ट होती है। Nifty 500 के 449 शेयर यानी 89.8 फीसदी अपने शिखर से 10 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। वहीं 347 शेयर यानी 69.4 फीसदी में 20 फीसदी से अधिक की गिरावट आ चुकी है। यानी बाजार में कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर बड़े हिस्से पर दिखाई दे रहा है।
क्या बाजार में राहत की उम्मीद है?
लगातार गिरावट के बीच बाजार में राहत की रैली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अभी इसे स्थायी निचले स्तर का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। Badjate Stock & Shares के निदेशक तुषार बडजाते के अनुसार, बाजार में वास्तविक ‘कैपिटुलेशन’ यानी घबराकर बड़े पैमाने पर बिकवाली की स्थिति अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दी है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में वोलैटिलिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम तेजी से बढ़ते हैं और बाजार में तेज उलटफेर देखने को मिलता है। उनके मुताबिक India VIX अभी भी निचले स्तरों पर है। इसके साथ ही मार्जिन फंडेड पोजीशन समेत सिस्टम में लीवरेज ऊंचे स्तर पर बना हुआ है और इंडेक्स फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट भी बढ़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चुनौती
बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बना हुआ है। ऐसे माहौल में आने वाली तेजी को लेकर बाजार में सावधानी बनी हुई है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर है कि विदेशी बिकवाली कब धीमी पड़ती है और बाजार की चौड़ाई में सुधार कब दिखाई देता है। Nifty भले ही पूरी तस्वीर में सीमित गिरावट दिखाता हो, लेकिन Nifty 500 के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में शेयर पहले ही काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में सिर्फ इंडेक्स नहीं, बल्कि व्यापक बाजार की स्थिति भी अहम भूमिका निभाएगी।


