Nepal Flash Flood: महाप्रलय ने नेपाल में मचाई तबाही, 5 हजार लोग लापता; जानिए कब किसी को कानूनी तौर पर मृत माना जाता है?

12 दिन बाद भी अपनों की तलाश, लापता लोगों के परिवारों की बढ़ी चिंता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने हजारों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। 26 अगस्त को आई इस प्राकृतिक आपदा में कई गांव पानी में डूब गए, जबकि सड़कें और मकान मलबे में दब गए। हादसे को 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन करीब 5 हजार लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। बचाव दल लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं, लेकिन कई परिवार आज भी अपने अपनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह सामने आ रहा है कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक लापता रहे और उसका शव भी बरामद न हो, तो उसे कानून के तहत कब मृत घोषित किया जा सकता है?

नेपाल के कानून में क्या है प्रावधान?

नेपाल के National Civil Code की धारा 40(4) के तहत ऐसी परिस्थितियों में कानूनी रास्ता उपलब्ध है। यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर प्राकृतिक आपदा या हादसे के दौरान अचानक लापता हो जाता है और परिस्थितियां उसके संभावित निधन की ओर इशारा करती हैं, तो उसके परिवार के सदस्य अदालत में आवेदन देकर न्यायिक मृत्यु की घोषणा की मांग कर सकते हैं। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के लिए कानून में कोई निश्चित न्यूनतम प्रतीक्षा अवधि तय नहीं की गई है। अदालत में आवेदन करते समय व्यक्ति के लापता होने की तारीख, स्थान, संभावित कारण और घटना से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देनी होती है।

अदालत कैसे लेती है फैसला?

अदालत आवेदन मिलने के बाद उपलब्ध सबूतों और परिस्थितियों की जांच करती है। इसके बाद अदालत यह तय करती है कि संबंधित व्यक्ति को कानूनी तौर पर मृत घोषित किया जाए या नहीं। यानी केवल लंबे समय तक किसी व्यक्ति का पता न चलने से वह अपने आप कानूनी रूप से मृत घोषित नहीं हो जाता। ऐसी स्थिति में न्यायिक घोषणा की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।

अगर मृत घोषित व्यक्ति वापस आ जाए तो?

कानून में ऐसी असामान्य स्थिति के लिए भी प्रावधान मौजूद है। यदि न्यायालय द्वारा मृत घोषित किया गया व्यक्ति बाद में जीवित वापस आता है, तो उसकी जानकारी सामने आने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर अदालत में याचिका या दावा दाखिल कर पहले की न्यायिक मृत्यु की घोषणा रद्द कराई जा सकती है।

अज्ञात शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती

नेपाल की इस आपदा में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ लापता लोगों को ढूंढना ही नहीं, बल्कि बरामद हुए अज्ञात शवों की पहचान करना भी है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई इलाकों में भारी मलबा जमा हो गया है। घरों, सड़कों और जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में करीब 600 विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। अब तक लगभग 1,344 मौतों की सूचना दर्ज की गई है। नेपाल पुलिस ने पहचान से जुड़ी जानकारी जुटाकर बड़ी संख्या में शवों को सुरक्षित रखा है, जिनमें महिलाएं, पुरुष और अज्ञात शव शामिल हैं।

लापता लोगों के परिवारों को अपने रिश्तेदारों की पहचान करने में मदद मिल सके, इसके लिए नेपाल पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर अज्ञात शवों से जुड़ी जानकारी और विवरण भी जारी किए गए हैं।

अपनों की वापसी का इंतजार

प्राकृतिक आपदा के बाद आंकड़े भले ही सामने आ रहे हों, लेकिन हर आंकड़े के पीछे किसी परिवार की एक कहानी है। किसी का बेटा लापता है, किसी की मां, किसी का भाई या जीवनसाथी अब तक घर नहीं लौटा है। बचाव अभियान जारी है और परिवारों की उम्मीद भी कायम है। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, लापता लोगों के परिजनों के सामने भावनात्मक चिंता के साथ-साथ अब कानूनी प्रक्रिया का सवाल भी खड़ा हो रहा है।

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