नई दिल्ली/अमेरिका : सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी META की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। भारत में नियमों और एल्गोरिदम को लेकर उठे विवाद के बाद अब अमेरिका की एक अदालत ने कंपनी को बड़ा झटका दिया है। न्यू मैक्सिको की अदालत ने किशोरों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामले में META पर 567 मिलियन डॉलर (करीब 54 अरब रुपये) का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म युवाओं को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखने के लिए तैयार किए गए हैं। इतना ही नहीं, नाबालिगों को ऑनलाइन शोषण और नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने में भी कंपनी अपेक्षित कदम नहीं उठा सकी।कोर्ट ने META को सिर्फ आर्थिक दंड ही नहीं दिया, बल्कि प्लेटफॉर्म पर बड़े बदलाव करने का भी निर्देश दिया है। अब कंपनी को टीनएजर्स के अकाउंट्स के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था, नोटिफिकेशन पर नियंत्रण, नाबालिगों से वयस्कों के संपर्क पर सख्ती, AI चैटबॉट्स के लिए सुरक्षा उपाय और बच्चों से जुड़ी शिकायतों की गंभीर निगरानी करनी होगी। ये निर्देश अगले पांच वर्षों तक लागू रहेंगे।
दरअसल, अमेरिका के 40 से ज्यादा राज्यों और 1,300 से अधिक स्कूल जिलों ने सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई छेड़ रखी है। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स की वजह से बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ा है। हालांकि, META ने अदालत के फैसले से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और फैसले के खिलाफ कानूनी अपील करेगी। इस फैसले को सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दुनिया के अन्य देशों में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर ऐसे सख्त नियम देखने को मिल सकते हैं।


