Maharashtra Education News : महाराष्ट्र सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग की दो योजनाओं को हमेशा के लिए बंद करने का फैसला लिया है। इनमें ‘पाठशाला और संस्कृत विकास के लिए अनुदान’ तथा ‘अन्य विशेष स्कूल’ योजनाएं शामिल हैं। लंबे समय से इन योजनाओं के तहत कोई खर्च नहीं हुआ था। ऐसे में सरकार ने योजनाओं की समीक्षा के बाद इन्हें बंद करने का निर्णय लिया है।
क्यों बंद की गईं ये योजनाएं?
सरकार का कहना है कि बदलती शैक्षणिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकारी योजनाओं की समीक्षा जरूरी है। उपलब्ध बजट का सही इस्तेमाल हो और जिन योजनाओं की उपयोगिता कम हो गई है, उनके स्थान पर संसाधनों का बेहतर नियोजन किया जा सके, इसी उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद 3 अगस्त को कल्याणकारी योजनाओं के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई और इन दोनों योजनाओं को बंद करने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में लोकसत्ता ने खबर प्रकाशित की है।
कई सालों से नहीं हुआ था एक भी रुपये का खर्च
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ‘पाठशाला और संस्कृत विकास के लिए अनुदान’ योजना के तहत वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक एक रुपये का भी खर्च नहीं हुआ। इतना ही नहीं, वर्ष 2017-18 के बाद इस योजना के लिए कोई नया प्रस्ताव भी प्राप्त नहीं हुआ था। वहीं, ‘अन्य विशेष स्कूल’ योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच कोई निधि खर्च नहीं की गई। लगातार कई वर्षों तक बजट का इस्तेमाल नहीं होने के कारण इन योजनाओं की वास्तविक उपयोगिता पर सवाल उठे।
अब आगे क्या होगा?
शिक्षा विभाग की इन दोनों योजनाओं को बंद करने के पीछे लंबे समय से उनका क्रियान्वयन नहीं होना और उनसे जुड़ी जरूरतों के लिए अन्य योजनाओं का उपलब्ध होना प्रमुख कारण बताया गया है। सरकार ने योजनाओं के पुनर्गठन के तहत इन्हें अधिक्रमित यानी पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अब ऐसी योजनाओं की समीक्षा कर रही है, जिन पर वर्षों से खर्च नहीं हुआ है। हालांकि, इन योजनाओं को बंद करने से संबंधित किसी नए लाभार्थी या संस्था पर पड़ने वाले विशिष्ट प्रभाव की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।


