म्यांमार : म्यांमार और बांग्लादेश की सीमा से जान बचाकर भाग रहे रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ बंगाल की खाड़ी में एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ है। खराब मौसम और ऊंची लहरों के कारण समुद्र में सफर कर रही दो नावें पलट गईं, जिनमें सवार सैकड़ों लोगों के डूबने की आशंका जताई जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों नावें जून के अंतिम सप्ताह में म्यांमार के पश्चिमी राखाइन क्षेत्र से रवाना हुई थीं। कुछ यात्रियों ने बांग्लादेश सीमा से भी सफर शुरू किया था। समुद्र में अचानक मौसम बिगड़ गया और तेज लहरों ने नावों को अपनी चपेट में ले लिया। पहली नाव में लगभग 250 लोग सवार थे और उसका संपर्क कुछ ही समय में टूट गया। दूसरी नाव, जिसमें करीब 280 लोग थे, इरावदी तट के पास हादसे का शिकार हुई। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दोनों नावों में सवार करीब 530 लोग लापता हैं।
स्थानीय तटरक्षक बल और बचाव दल लगातार खोज अभियान चला रहे हैं। कई शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बाकी लोगों की तलाश जारी है। समुद्र में खराब मौसम के कारण बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। UNHCR और IOM ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। दोनों संस्थाओं का कहना है कि मृतकों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री त्रासदियों में से एक हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में समुद्री यात्रा बेहद जोखिम भरी होती है। तेज हवाएं, लगातार बारिश और ऊंची लहरें छोटी नावों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसके बावजूद बेहतर और सुरक्षित जीवन की उम्मीद में कई रोहिंग्या परिवार समुद्र का खतरनाक रास्ता चुनने को मजबूर हो जाते हैं। यह हादसा सिर्फ एक समुद्री दुर्घटना नहीं, बल्कि उन विस्थापित परिवारों की बेबसी की कहानी है जो सुरक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर हैं।


