अमेरिका-ईरान टकराव से होर्मुज में फिर तनाव, भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

7 घंटे तक बमबारी, व्यापारिक जहाजों पर हमले और खाड़ी में फंसे भारतीयों ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

होर्मुज : मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। अमेरिका ने लगातार चौथे दिन ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए करीब सात घंटे तक बमबारी की। इस कार्रवाई के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात और बिगड़ गए हैं। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और इसका असर भारतीय नाविकों पर भी दिखाई देने लगा है।

जानकारी के मुताबिक अमेरिकी हमलों में ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ कुछ नौसैनिक संसाधनों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। पिछले 24 घंटों में बढ़े इस संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ा दी है। होर्मुज से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमले की खबर है। इनमें एक भारतीय नागरिक की मौत हुई, जबकि 10 लोग घायल हुए। जहाज पर कुल 20 भारतीय नाविक मौजूद थे। घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास के उपप्रमुख को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

युद्ध जैसी स्थिति के कारण भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल पर्शियन गल्फ क्षेत्र में फंसे हुए हैं। वे संघर्ष कम होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व के नेताओं से बातचीत के बाद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर प्रस्तावित 20 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला वापस ले लिया। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। ऐसे में यहां बढ़ता सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला मामला बन जाता है।

खाड़ी में काम करने वाले हजारों भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की चिंता इस समय बढ़ गई है। कई जहाज संघर्ष वाले इलाके के पास रुके हुए हैं। भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई और तेज होती है, तो इसका असर तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाएंगे या खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष और गहरा होगा।

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